रविंद्र ने पत्नी और मां को जगाकर बाहर निकाला
तभी रात लगभग बारह बजे उसे गर्मी महसूस हुई। इस पर उसकी आंख खुल गई, तो देखा की झोपड़ी में आग की लपटे उठ रहीं हैं। यह देख रविंद्र ने पत्नी और मां को जगाकर बाहर निकाला। साथ ही झोपड़ी में बंधी पांच बकरियों को निकालने के लिए जलती झोपड़ी में घुसकर उन्हें बाहर निकालने लगा। मां भी बकरियों को बचाने में जुट गई। इस बीच आग की चपेट में आकर दो बकरियां मर गईं।
कड़ी मशक्कत के बाद आग काबू पाया
वहीं, तीन बकरियां झुलस गईं। उन्हें बचाने में रविंद्र व उसकी मां राधारानी के हाथ झुलस गए। आग लगने से हुए शोरगुल सुनकर तमाम ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। जहां पीड़ित ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया, लेकिन तब तक वहां रखी आठ हजार की नकदी, गेहूं, चावल और गृहस्थी का सारा सामान जलकर राख हो गया था।
आंकलन करके रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी
उन्होंने बताया कि आग से लगभग दो लाख रुपये की क्षति हुई है। प्रधान प्रतिनिधि अमित कुमार की सूचना पर पशु चिकित्सा अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। जहां उन्होंने घायल बकरियों का इलाज किया। क्षेत्रीय लेखपाल पंकज ने बताया की नुकसान का आंकलन करके रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। जिससे पीड़ित मजदूर को आर्थिक मदद मिल सके।