वॉटर पार्क में दिन भर की धमाचौकड़ी के बाद बस में गपशप का दौर चल रहा था। कोई सीट पर बैठकर दोस्तों से मस्ती कर रहा था तो कोई हेडफोन लगाकर गाने सुन रहा था। पार्क की यादों और हंसी-मजाक के बीच अचानक बगल से गुजर रहे बाइक सवार ने हमें रोकने की कोशिश की। एक पल तो उनको इशारा समझ नहीं आया, जैसे ही खिड़की खोली उन्होंने चिल्लाकर कहा बस रोको...टायर में आग लगी है।
आग की बात सुनकर बच्चे डर गए और चिल्लाने लगे। ड्राइवर ने बस को किनारे लगाया और हमारे शिक्षक विवेक सर, सत्येंद्र कटियार और आदर्श ने हम सबको सुरक्षित नीचे उतार दिया। देखते ही देखते हमारी आंखों के सामने बस आग का गोला बन गई। बस में सवार कक्षा नौ के छात्र युनित कुमार ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान आंखों देखा हाल सामने रखा। युनित ने बताया कि बस में करीब 50 बच्चे, शिक्षक थे, लेकिन किसी को कोई खरोंच नहीं आई। कुछ बच्चों के बैग जरूर जल गए।