इटावा में गुरुवार को युवक से बातें करते देख बेटी को मौत के घाट उतारने वाले पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वर्ष 2015 में हुए इस हत्याकांड का बृहस्पतिवार को फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो. कमरुज्जमा खान ने हत्यारे को 25 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया। मामले के चार अन्य अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के वकील तरुण कुमार शुक्ला के अनुसार 31 जुलाई 2015 को बकेवर थाने के गांव पृथ्वीरामपुर के पास सेंगर नदी में युवती का शव मिला था। उसकी शिनाख्त भरथना के खानपुरा निवासी लक्ष्मी के रूप में हुई। पिता महेश चंद्र और बाबा जिलेदार सिंह ने कपड़ों व मोबाइल के आधार पर बेटी की शिनाख्त थी।
छानबीन के दौरान मामला ऑनर किलिंग का पाया गया। पुलिस ने विवेचना में बताया कि महेश चंद्र ने अपनी पुत्री लक्ष्मी को गोविंद नाम के युवक से बात करते हुए देखा था। 27 जुलाई 2015 को महेश और अन्य परिजनों ने लक्ष्मी की हत्या कर दी। उन्होंने शव को सेंगर नदी में फेंक दिया।
पुलिस ने कोर्ट में महेश चंद्र, उसके पिता जिलेदार सिंह, चाचा नेत्रपाल सिंह, रिश्तेदार राजेंद्र सिंह व मनीषा देवी के खिलाफ चार्जशीट पेश की। कोर्ट ने सुनवाई और बयानों के आधार पर महेशचंद्र को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।