एमआरआई में यूट्रेस में तीन किलो के ट्यूमर का पता चला था, तो ऑपरेशन कर उसे बाहर निकाला गया। कुछ दिन बाद उसके बिटिया के पेट में फिर दर्द हुआ तो राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बच्चेदानी में गांठ का पता चला। इसके बाद में पता चला कि गांठ कैंसर की है, तो पीजीआई में दिखाया। वहां पर बच्चेदानी कमजोर होने की बात कहकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया।
बेटी को ओटी से निकाल दिया, कहा- इसकी सर्जरी हो नहीं सकती
इसके बाद एक निजी अस्पताल में किसी तरह तीन बार डायलिसिस कराई पर दर्द बढ़ता चला गया। उसे दर्द से छटपटाता देख खुद उसे मैं दर्द के इंजेक्शन देता था। कानपुर में एक निजी अस्पताल ने ऑपरेशन थियेटर से बेटी को यह कहकर निकाल दिया कि इसकी सर्जरी हो नहीं सकती। इसके बाद हैलट के स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉ. पाविका लाल को समस्या बताई, तो वह सर्जरी के लिए तैयार हो गईं। सर्जरी के बाद अब बिटिया बिल्कुल सही है।
युवती की दोनों किडनी खराब थीं। सीरम, क्रेटनिन बहुत बढ़ गया था। कैंसर का संक्रमण आंतों तक पहुंच गया था। मरीज की स्थिति काफी नाजुक थी, ऐसे में सर्जरी काफी कठिन थी। उसका ऑपरेशन तीन घंटे चला। सर्जरी के बाद उसे आईसीयू में चार दिन रखा गया और 20 दिन बाद हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। यह अपनी तरह की रेयर टाइप कैंसर सर्जरी थी। -डॉ. पाविका
युवती को एक जनवरी को भर्ती किया गया था। फरवरी की शुरुआत में उसकी सफल सर्जरी की गई थी। डॉ. पाविका, डॉ. गरिमा, डॉ. रश्मि के साथ यूरो सर्जन डॉ. विनय की टीम ने ऑपरेशन को सफल बनाया है। 21 जुलाई 2022 को कैंसर की ओपीडी शुरू हुई थी। अभी तक 170 महिलाओं की कैंसर सर्जरी हो चुकी है। -डॉ. नीना गुप्ता, स्त्री प्रसूति विभागाध्यक्ष