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Fatehpur: वाल्मीकि परिवार तक पहुंचने में नाकाम रहे कांग्रेसी, बैरिकेडिंग तोड़ने पर हिरासत में लिए गए

Sat, 11 Oct 2025 07:23 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

वाल्मीकि परिवार से मिलने पहुंचे कांग्रेसियों को पुलिस ने रोका। प्रशासन की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश में कांग्रेसियों को हिरासत में लिया गया।
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कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फतेहपुर में तुराबअली के पुरवा निवासी दिवंगत हरिओम वाल्मीकि के परिजन से मुलाकात और आर्थिक मदद देने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शनिवार को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। प्रशासन की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश में कांग्रेसियों को हिरासत में लिया गया। दरअसल, रायबरेली की घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को प्रशासन ने पहले ही लखनऊ में रोक दिया था। इसके बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरिफ गुड्डा के नेतृत्व में कार्यकर्ता हरिओम के घर की ओर रवाना हुए। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग की थी।
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करीब सवा दो बजे 100 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और बैरिकेडिंग हटाने की मांग की। पुलिस के समझाने पर भी जब वे पीछे नहीं हटे, तो बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने लगे। इस पर सीओ सिटी गौरव शर्मा ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें रोका और फिर से बैरिकेडिंग के पास लाया गया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी, कानपुर जिलाध्यक्ष अंबरीश सिंह गौड़, प्रयागराज अध्यक्ष अशफाक अहमद, कौशांबी अध्यक्ष गौरव पांडेय, नगर अध्यक्ष पवन गुप्ता, उपाध्यक्ष पूजा भारद्वाज, प्रवक्ता इंजीनियर देवी प्रकाश दुबे, कलीम उल्ला सिद्दीकी, शिवाकांत तिवारी सहित 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। कांग्रेसियों का कहना था कि वे केवल शोक संवेदना प्रकट करने और आर्थिक सहायता देने जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने अनावश्यक सख्ती दिखाई। कोतवाल तारकेश्वर राय के अनुसार सभी को पूछताछ के बाद शाम को बिना किसी कार्रवाई के रिहा कर दिया गया।

वाल्मीकि परिवार तक पहुंचने में कांग्रेसी विफल, बैरिकेडिंग तोड़ने पर गिरफ्तारी
शहर के तुराबअली के पुरवा में रहने वाले दिवंगत हरिओम वाल्मीकि के परिजनों को आर्थिक मदद देने जा रहे कांग्रेसियों को शनिवार को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की।
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इसके बाद कोतवाली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया और पूछताछ के बाद कानूनी औपचारिकताएं की। रायबरेली में हुए वाल्मीकि परिवार के सदस्य की हत्या को लेकर शनिवार को शहर आने पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय व बसपा के पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को प्रशासन ने पहले ही लखनऊ में रोक दिया था। इस सूचना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर अध्यक्ष आरिफ गुड्डा के साथ मृतक के घर की ओर कूच कर दिया। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से मृतक के घर की ओर जाने वाले मार्ग पर पुलिस बल तैनात करते हुए बैरिकेडिंग कर दी थी। दोपहर सवा दो बजे पहुंचे सौ से अधिक कांग्रेसियों ने पुलिस से रास्ता खोलने के लिए कहा, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद जब कांग्रेसी पीछे नहीं हटे और बैरिकेडिंग पार कर दौड़ लगाते हुए आगे बढे। सीओ सिटी गौरव शर्मा मौर्चा संभालते हुए कांग्रेसियों को वापस कर फिर से बैरिकेट के पास ले आए और कोतवाली में बातचीत का हवाला देते हुए कौशांबी जिलाध्यक्ष के साथ कानपुर जिलाध्यक्ष व शिवाकांत, शहर अध्यक्ष को गिरफ्तार हिरासत में लिया गया।

इसके साथ हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेताओं में कानपुर देहात जिलाध्यक्ष अंबरीस सिंह गौड़, प्रयागराज अध्यक्ष अशफाक अहमद, कौशांबी अध्यक्ष गौरव पांडेय, नगर अध्यक्ष पवन गुप्ता, उपाध्यक्ष पूजा भारद्वाज, प्रवक्ता इंजीनियर देवी प्रकाश दुबे, कलीम उल्ला सिद्दीकी, शिवाकांत तिवारी सहित 15 कांग्रेसी शामिल रहे। प्रशासन ने पीडित के परिजनों से कांग्रेसियों की मुलाकात रोकने की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष देखा गया। जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी ने बताया कि वह केवल शोक संवेदना प्रकट करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने जा रहे थे। लेकिन प्रशासन ने गैर जरूरी सख्ती दिखाई। कोतवाल तारकेश्वर राय ने बताया कि कानपुर, कौशांबी, प्रयागराज समेत जिले के 15 कांग्रेसियों को हिरासत में लिया गया था। शाम को बिना कार्रवाई के रिहा कर दिया गया।

गोली मार दो लेकिन गरीब परिवार की करेंगे मदद: गौरव पांडेय
कौशांबी जिलाध्यक्ष गौरव पांडेय व कोतवाली प्रभारी के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। जिलाध्यक्ष ने बताया कि वह पीड़ित परिवार से मिलने के लिए जा रहे थे, तभी कोतवाली प्रभारी ने उन्हें रोका। हम महात्मा गांधी के विचार धारा के लोग केवल मदद करने के लिए आगे आए है, लेकिन प्रभारी का धमकाना ठीक नहीं था। अब हमें चाहे गोली मार दी जाए, लेकिन पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचा के रहेगें।
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