फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: युवक ने भाभी को फावड़े से काट डाला, मदर्स डे पर तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया

Sun, 10 May 2020 11:38 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
फर्रुखाबाद के मोेहल्ला नगला दीन मे पड़ोसी से मोबाइल पर बात करने से नाराज युवक ने रविवार दोपहर भाभी को फावड़े से ताबड़तोड़ वार कर मरणासन्न कर दिया। आरोपी घटना को अंजाम देकर फरार हो गया। पुत्र की सूचना पर आए पति ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। कर्नलगंज चौकी इंचार्ज ने मौके पर जाकर ई-रिक्शा से घायल महिला को लोहिया अस्पताल में पहुंचाया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन


फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नगला दीना गुजराती वाली गली निवासी धर्मेंद्र मिश्रा भट्ठे पर काम करते हैं। रविवार दोपहर धर्मेंद्र की पत्नी प्रीती (36) घर पर थी। पुत्र अरुण (12), वरुण (9), पुत्री प्रतिभा व भाई विपिन लूडो खेल रहे थे। विपिन ने भतीजे अरुण को समोसे लाने भेज दिया। वरुण व प्रतिभा दरवाजे पर खड़े होकर अरुण का इंतजार करने लगे।

तभी विपिन ने कमरे में सो रही भाभी प्रीती के मुंह पर फावड़े से ताबड़तोड़ कई वार किए। अरुण के आने पर आरोपी फावड़ा वहीं फेंककर फरार हो गया। मां को बुरी तरह से घायल देख बच्चे बिलखने लगे। उन्होंने पिता को जानकारी दी। धर्मेंद्र की सूचना पर कर्नलगंज चौकी इंचार्ज तेजबहादुर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रीती को लोहिया अस्पताल भेजा जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुलिस ने घटना में प्रयुक्त फावड़ा बरामद कर लिया है। अरुण ने पुलिस को बताया कि मां के मोबाइल पर पड़ोसी से बात करने का चाचा विरोध करते थे। इस पर शनिवार रात चाचा की मां से कहासुनी भी हुई थी। चाची इस समय दिल्ली में लॉकडाउन में फंसी हैं। चौकी इंचार्ज तेजबहादुर ने बताया कि तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा। आरोपी देवर को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

बीस मिनट तक सड़क पर तड़पती रही प्रीती
जानकारी पर पहुंचे चौकी इंचार्ज तेजबहादुर ने पास के निजी अस्पताल से स्ट्रेचर मंगवाया और घायल प्रीती को सड़क तक ले आए। लॉकडाउन से बाहर कोई वाहन नहीं मिल रहा था। इस पर कोतवाल जसवंत सिंह को जानकारी दी लेकिन वह भी मौके पर नहीं पहुंचे। बीस मिनट तक प्रीती वहां तड़पती रही।

मोहल्ले के लोग एक कार लेकर आए लेकिन स्ट्रेचर उसके अंदर नहीं जा पा रहा था। कुछ देर बाद एक सिपाही ई-रिक्शा लेकर आया। तब प्रीती को अस्पताल भेजा जा सका। अगर सही समय पर वाहन मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें