बुद्ध पूर्णिमा पर अलग-अलग स्थानों पर गंगा में नहाते समय सात लोग डूब गए। काफी प्रयास के बाद भी डी-फार्मा के छात्र और एक बच्चे को नहीं बचाया जा सका। छात्र चार दोस्तों और बच्चा परिवार के साथ गंगा नहाने गया था। छात्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
फतेहगढ़ कोतवाली के मोहल्ला नेकपुर चौरासी निवासी अजय प्रताप कटियार का पुत्र अभिषेक कटियार (26), मोहल्ले के ही मनीष (25), श्लोक (23), रानू (25) और बिल्हौर निवासी रिश्तेदार दीपक के साथ सोमवार सुबह गंगा नहाने गए थे। पांचों दुर्वाषा ऋषि आश्रम से आगे गंगा नहा रहे थे कि तभी सबसे पहले श्लोक डूबने लगा। उसे मनीष और अभिषेक ने बचाया तो वह दोनों भी डूबने लगे।
रानू और दीपक ने तीनों को बचाने के लिए हाथ बढ़ाया, तब तक तीनों गहरे पानी में जा चुके थे। रानू और दीपक ने शोर मचाया तो एक नाव पर सवार युवकों ने मनीष और श्लोक को बचा लिया। वहीं, अभिषेक गहरे पानी में समा गया। गोताखोरों ने काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला। उसे लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि वह इकलौता बेटा था। वह डी-फार्मा का छात्र था। मां सीता, पिता अजय प्रताप और परिजन बेहाल हैं। बिना पोस्टमार्टम कराए परिजन शव घर लेकर चले गए।
उधर, कादरीगेट थाने के अमेठी कोहना निवासी राजीव अपने परिवार के साथ गंगा नहाने गए थे। पैंटून पुल के पास बेटा आशिक (8) और कार्तिक (10) नहा रहे थे। दोनों गहरे पानी में जाने लगे। जब तक पकड़ने का प्रयास किया, जब तक आशिक गंगा में समा गया। करीब एक घंटे बाद उसे निकाला जा सका। घटना के बाद बहन आशिकी, मां सोनम आदि परिजन बेहाल हैं।
घाटों पर अव्यवस्था जिंदगियों पर पड़ गई भारी
बुद्ध पूर्णिमा पर्व पर भी प्रशासन ने गंगा के गहरे घाटों पर सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किए थे। स्नान के दौरान किसी भी स्थान पर पुलिस व्यवस्था नहीं दिखाई दी। यही नहीं गहरे जल में बैरिकेडिंग भी कराने की जरूरत नहीं समझी गई। घाट पर खड़े लोग ही अपनों की देखरेख करते दिखे। लोग यही कहते दिखे कि पुलिस अगर जागरूक होती तो यह हादसे न होते।