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Farrukhabad: बाढ़ राहत सामग्री लेने जा रहा वृद्ध बाढ़ के पानी में बहा, मौत

Thu, 14 Aug 2025 07:41 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद

सार

गांव से एक किमी. दूर प्रधान के घर पर राहत सामग्री बांटी जा रही थी। सामग्री लेने जा रहे वृद्ध की बाढ़ के पानी में बहने से मौत हो गई।
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मृतक रिषिपाल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाढ़ पीड़ित लोग जान जोखिम में डालकर राहत सामग्री लेने जाने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते गुरुवार को गांव से एक किलोमीटर दूर बांटी जा रही राहत सामग्री लेने जाते समय वृद्ध पानी की तेज धार में बह गया। खोजबीन के दौरान उसका शव ग्रामीणों व परिजनों ने बाहर निकाला। तहसील प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वृद्ध का नाम राहत सामग्री पाने वालों की सूची में था ही नहीं।

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थाना क्षेत्र के गांव कुतलूपुर व कुबेरपुर बाढ़ से घिरा हुआ है। बुधवार दोपहर बाद राजस्व कर्मी कुतलूपुर गांव से करीब एक किलोमीटर दूर प्रधान अजीत सिंह के घर के पास बाढ़ राहत सामग्री बांट रहे थे। गांव कुतलूपुर निवासी रिषिपाल (65) पुत्र कैलाश भी राहत सामिग्री लेने गए। सूची में ंनाम न होने पर वह नाराज होकर वापस लौट रहे थे। कुतलूपुर पुलिया के पास पहुंचने के दौरान रिषिपाल तेज धार में बह गए। यह देख ग्रामीणों ने शोर-शराबा मचाना शुरू कर दिया। जानकारी मिलने पर रिषिपाल के पुत्र संतोष व शीशराम आदि भी आ गए। ग्रामीणों और परिजनों ने बाढ़ के पानी में रिषिपाल की तलाश शुरू की।

करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रिषिपाल को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पत्नी की मौत हो चुकी है। मृतक के पांच बेटे संतोष कुमार, शीशराम, मानसिंह, पिंटू व नन्हें हैं। थानाध्यक्ष कामता प्रसाद गौतम ने बताया कि परिजनों ने कोई जानकारी नहीं दी। जानकारी मिलने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार ने बताया कि प्रधान अजीत सिंह के घर के पास राहत सामग्री बांटी जा रही थी। 550 लोगों को राशन सामग्री बांटी गई। रिषिपाल राशन लेने नहीं आए थे। उनका नाम भी राशन सूची में नहीं था। कानूनगो अतुल कुमार ने बताया कि रिषिपाल के पुत्र संतोष का नाम राहत सामग्री वितरण सूची में था। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि रिषिपाल राहत सामिग्री लेने गए थे। सूची में अपना नाम न देख वह नाराज होकर पैदल ही गांव चल दिए। ग्रामीण उनसे ट्रैक्टर-ट्राली में बैठने की बात कहते रहे, लेकिन उन्होंने नहीं सुना।

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पिता के हाथ से छूटे बच्चे बाढ़ की धार में बहे, ग्रामीणों ने बचाया
जाको राखे साइयां, मार सके न कोय... यह कहावत उस वक्त सच साबित हुई जब एक पिता के हाथ से छूटे दो मासूम बच्चे बाढ़ की तेज धार में बहने लगे, लेकिन ग्रामीणों की बहादुरी ने उन्हें काल के मुंह से खींच निकाला। तहसील क्षेत्र के गांव पट्टी बदनपुर चारों ओर से बाढ़ से घिरा हुआ है। ग्रामीणों ने मजबूरी में एनएच-730सी हाईवे के किनारे शरण ली हुई है। गांव में प्रशासन की ओर से अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।

बृहस्पतिवार को हीरालाल अपने छह वर्षीय बेटे अनमोल और आठ वर्षीय बेटी पारी को हाथ पकड़कर गांव से सड़क की ओर ला रहे थे। गांव के बाहर मंदिर के पास तेज बहाव वाली धारा को पार करते समय हीरालाल के हाथ से बच्चे छूट गए और बाढ़ की धार में बहने लगे। अचानक हुई इस घटना से हीरालाल चीख पड़े और कुछ देर के लिए बेसुध हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत तेज बहाव में कूदकर दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्चों को जीवित और सुरक्षित देख पिता की जान में जान आई। ग्रामीणों की सतर्कता और साहस के चलते एक बड़ा हादसा बच गया। एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि गांव में जल्द ही नाव की व्यवस्था की जाएगी। जो लोग हाईवे किनारे रह रहे हैं, उन्हें बाढ़ शरणालय में स्थानांतरित किया जाएगा।
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