खेत पर खड़ी सरसों की फसल। (संवाद)
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कानपुर देहात। जिले के किसानों ने पारंपरिक खेती का मोह छोड़कर इस बार मुनाफे के फसल की ओर कदम बढ़ाए हैं। राई, सरसों पर छाई महंगाई को देखते हुए बंपर बुआई की गई है। सरसों का रकबा लक्ष्य से 31 प्रतिशत अधिक हो गया है। वहीं गेहूं का रकबा करीब 25 फीसदी घट गया है। गेहूं के बीज की बिक्री काफी कम हुई है।
जिले के किसान अभी तक धान, गेहूं के अलावा अन्य फसलों के बारे में नहीं सोचते थेे। राई व सरसों का रकबा तो 20 हजार हेक्टेयर तक सिमट कर रह जाता था। इससे राई, सरसों का उत्पादन जिले में काफी कम हो गया था। इस बार सरसों के तेल के दाम दो सौ रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए। ऐसे में सरसों के दामों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई।
विपक्ष भी इस मुद्दे को उठाने लगा। सरसों के तेल की महंगाई देखकर किसानों को भी इस फसल में मुनाफा नजर आने लगा। जिले में इस वर्ष सरसों, राई बोने के लिए कृषि विभाग ने 25 हजार 831 हेक्टेयर लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य के सापेक्ष 33 हजार 838 हेक्टेयर जमीन में सरसों बोया गया है। लक्ष्य से 33 फीसदी अधिक रकबा में राई, सरसों बोई गई है।
वहीं पिछले साल सिर्फ 24 हजार 843 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही राई, सरसों की फसल बोई गई थी। तेल के दामों में बढ़ोतरी होने से किसानों ने तिलहन की फसल करने में खूब रुचि ली है। वहीं एक लाख 23 हजार 79 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई का लक्ष्य रखा गया इसमें अभी तक 92 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई हुई है। गेहूं का रकबा लक्ष्य से 25 फीसदी कम हो गया है। जबकि पिछले वर्ष एक लाख 23 हजार 781 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई थी।
किसानों ने बाजार की संभावना को देखते हुए राई, सरसों की बुआई काफी अधिक की है। लक्ष्य से 33 फीसदी रकबा अधिक हो गया है। जिले में तिलहन का उत्पादन काफी ठीक रहेगा। वहीं गेहूं का रकबा काफी घट गया है।
-डॉ उमेश कुमार गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी