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धान बेचने के लिए किसानों को देना पड़ रहा बारदाना, पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

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अकबरपुर क्रय केंद्र पर धान की तौल कराते किसान। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। सरकारी खरीद केंद्रों पर इस बार किसानों को धान बेचने के लिए खुद बोरे खरीदकर लगाना पड़ रहा है। यह स्थिति मिलर्स के क्रय एजेंसियों को उधार बारदाना देने से इन्कार के बाद बनी है। सौ क्विंटल धान बेचने में बारदाना पर छह से सात हजार रुपये का व्यय आ रहा है। वहीं जेब हल्की होने से किसान परेशान हो रहे हैं।
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सरकारी धान की खरीद में मिलर्स से पुराने बोरे लिए जाते थे। मिलर्स से उधार बारदाना लेकर सरकार बाद में भुगतान करती थी। बीते वर्ष में मिलर्स से लिए बारदाना का भुगतान नहीं हो सका है। इधर खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में सरकार ने बारदाना उपलब्ध कराने से किनारा कर लिया। धान खरीद की शुरुआत के लिए अफसरों ने मिलर्स से कुछ बारदाना उधार लिया।
इससे धान की सरकारी खरीद शुरू करा ली गई। जिले में मौजूदा समय में 12 मिलर्स है। पुराना भुगतान अटका होने का तर्क देकर मिलर्स ने उधार बारदाना देने से इन्कार कर दिया। इसको लेकर अब धान बेचने के इच्छुक किसानों को अपना बारदाना देना पड़ रहा है।
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अधिकारी किसानों को उनका बारदाना वापस करने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। खुले बाजार में पुराना बारदाना करीब 25 से 30 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से मिल पा रहा है। सौ क्विंटल धान रखने के लिए ढाई सौ बोरों की जरूरत होती है।
सरकार ने मिलर्स से बारदाना खरीदने की नीति बदल दी है। अब पुराना भुगतान फंसा होने से मिलर्स ने उधार बारदाना देने से इन्कार कर दिया है। ऐसे में धान रखने के लिए जूट के बोरे लाने पर किसानों से खरीद हो रही है। किसानों के लगाए बोरों का ब्योरा रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। बाद बारदाना किसानों को वापस किया जाएगा। - राघवेंद्र प्रताप सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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