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हरदोई: भूमि विवाद में चचेरे भाइयों ने की किसान की हत्या, चार घायल

Tue, 01 Dec 2020 06:50 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई जिले में टड़ियावां थाना क्षेत्र के खजुरिया नगला में मंगलवार सुबह भूमि विवाद में चचेरे भाइयों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान एक किसान की चाकुओं से गर्दन काटकर हत्या कर दी गई, जबकि चाकू लगने से चार लोग घायल भी हो गए।
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सभी को जिला अस्पताल मेें भर्ती कराया गया है। मृतक के चचेरे भइयों समेत छह लोगों के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई है। खजुरिया नगला मजरा अलीशाबा निवासी महेंद्र पाल (46) पुत्र गोविंद खेती करता था।

हेंद्र ने अपने घर के सामने ही स्थित लगभग एक बीघाभूमि का बैनामा कुछ माह पहले करा लिया था। इस भूमि पर महेंद्र पाल के चचेरे भाइयों विकास, अंकित और अंकुल पुत्र परशुराम का घूरा था। वहां पर कंडे रखे जाते थे।
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सोमवार शाम घूरा आदि हटाने के लिए कहा तो दोनों पक्षों में तकरार हो गई थी। मंगलवार सुबह लगभग दस बजे महेंद्र अपने घर से गांव में ही परचून की दुकान पर पान मसाला लेने के लिए गया था।

इसी दौरान विकास, अंकित , अंकुल, विनोद पुत्र बाबूराम, पंकज पुत्र रामस्वरूप और सतीश पुत्र श्रीकृष्ण ने लाठी डंडों और चाकुओं से महेंद्र पर हमला बोल दिया। महेंद्र की गर्दन पर कई वार किए गए और वह वहीं गिर गया।
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इसी बीच महेंद्र का भाई मन्नीलाल (44), मन्नीलाल की पत्नी रामदेवी (40), उसका दामाद ओम शरण (25) और महेंद्र की विवाहित पुत्री विनीता (22) पत्नी समरजीत निवासी मन्नापुरवा कोतवाली देहात भी घटनास्थल पर पहुंच गईं।

आरोपियों ने इन लोगों पर भी धारदार हथियारों और लाठी डंडों से वार किए। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से पांचों लोगों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां महेंद्र को मृत घोषित कर दिया गया। टड़ियावां के प्रभारी निरीक्षक एसपी उपाध्याय ने बताया कि सभी छह आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।

थाना समाधान दिवस में भी नहीं निपट पाया था मामला
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक  महेंद्र पाल ने खरीदी गई भूमि पर विकास, अंकित आदि का कब्जा होने की शिकायत पुलिस और राजस्व विभाग से की थी।

बीते शनिवार को थाना समाधान दिवस में दोनों पक्षों की बात भी राजस्व और पुलिस के अधिकारियों ने सुनी थी। बावजूद इसके पूरे मामले का निस्तारण नहीं हो पाया था। विकास, अंकित आदि का कहना था कि वह लोग पिछले कई वर्ष से भूमि पर काबिज हैं, जबकि महेंद्र का कहना था कि जब भूमि उसने खरीद ली है, तो उस पर मालिकाना हक भी उसी का है।
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