फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: नवजात की मौत पर भड़का गुस्सा, परिजन ने अस्पताल में की तोड़फोड़; मासूम बेटी को बार-बार पूछती रही बेबस मां

Tue, 10 Feb 2026 01:05 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर के नर्सिंग होम के बेबी वार्मर मशीन में आग में जलकर हुई नवजात की मौत के मामले में परिजनों का गुस्सा भड़क गया। परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। 
विज्ञापन
raja hospital kanpur - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर के बिठूर स्थित राजा नर्सिंग होम के बेबी वार्मर मशीन में आग में जलकर नवजात की मौत के मामले में सोमवार को गुस्साए परिजनों ने हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की। मामले में बिठूर पुलिस ने करीब 20 घंटे बाद बच्ची की बुआ की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 
विज्ञापन


वहीं, पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम नवजात का शव परिजन के सुपुर्द कर दिया गया। बिठूर के रमेल नगर निवासी अरुण निषाद की पत्नी शालू ने रविवार शाम ऑपरेशन के बाद बच्ची को जन्म दिया था। डॉक्टर के कहने पर बच्ची को स्टाफ ने एनआईसीयू वार्ड की वार्मर मशीन में रख दिया था। 

वार्मर मशीन में शार्ट सर्किट से अचानक आग लगने पर उसमें रखी नवजात ने बुरी तरह झुलसने के बाद दम तोड़ दिया था। इस घटना से आहत परिजन ने अस्पताल डॉक्टर और स्टॉफ को बच्ची की मौत का जिम्मेदार बता दिनभर हंगामा काटा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे। 
विज्ञापन

 

दोपहर बाद कुछ परिजन ने अस्पताल के की दूसरी मंजिल पर तोड़फोड़ कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची बिठूर पुलिस ने परिजन को बड़ी मुश्किल से समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं, शाम को एक बार फिर काफी संख्या में ग्रामीण अस्पताल के बाहर इकट्ठा होकर हंगामा करते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। बाद में बच्ची की बुआ की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली।
 

हाथ धोने गई स्टाफ नर्स तभी वार्मर मशीन में लग गई आग
एनआईसीयू वार्ड में रविवार को स्टाफ नर्स तनु की ड्यूटी थी। तनु ने बताया कि वार्ड में कुल 4 वॉर्मर मशीने हैं। 4 बजकर 15 मिनट पर नवजात की हालत ठीक न होने पर डॉक्टर सपना ने वार्मर मशीन पर लिटाने को कहा था। उसने ही नवजात को वार्मर मशीन पर लिटाया था। 

 

थोड़ी देर बाद उसने ग्लव्स उतारे और हाथ धोने के लिए बाथरूम में चली गई। करीब 4 मिनट बाद जब हाथ धोकर वापस आई तो वार्मर मशीन से धुएं और लपटें निकलती दिखीं। इस पर वह मदद के लिए चिल्लाई। 
 

शोर सुनकर ओटी टेक्नीशियन मुलायम सिंह यादव ने जलती हुई बच्ची को वार्मर मशीन से बाहर निकाला और फर्श पर लिटाकर कपड़े से आग बुझाने की कोशिश की। इसी बीच अस्पताल कर्मी प्रदीप फायर सिलिंडर लेकर आए और वॉर्मर की आग बुझाई।
 

सात माह पहले स्वाहा हो चुके हैं आग बुझाने के उपकरण
राजा नर्सिंग होम में सोमवार सुबह संवाददाता पहुंचा तो वहां कई कमियां नजर आईं। यहां अस्पताल की हर मंजिल पर फायर सिस्टम तो लगा दिखा, लेकिन यहां लगे फायर सिलेंडर पर लगी स्लिप के मुताबिक ये फायर सिलेंडर 3 जुलाई 2025 तक ही क्रियाशील थे। वहीं ऊपरी मंजिल पर की सीढ़ियों पर खाली गत्तों का ढेर लगा था। 

 

अस्पताल में कोई आपातकालीन द्वार भी नहीं है। अस्पताल में घटना में वक्त 15 मरीजों का इलाज चल रहा था। उनके साथ करीब 25 से 30 तीमारदार भी अस्पताल परिसर में मौजूद थे।

पंजीकृत अस्पताल 595, कल्याणपुर और नौबस्ता में ही 700 से ज्यादा अस्पतालों में एनआईसीयू
कानपुर जिले में 595 अस्पताल पंजीकृत हैं जबकि कल्याणपुर और नौबस्ता में ही 700 से ज्यादा अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनके बाहर एनआईसीयू का बड़ा सा बोर्ड भी लगा है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को आठ अस्पतालों की पड़ताल की तो जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसे मामले सामने आए। छोटे-छोटे कमरों में बिना डॉक्टर के अस्पतालों में नर्स मरीजों का इलाज करते मिलीं।

 

कल्याणपुर से नौबस्ता तक अस्पतालों में बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में एनआईसीयू, एसएनसीयू, आईसीयू आदि लिखा मिला जबकि अस्पताल छोटे-छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं। एक बड़े हॉल को स्लाइडर से डिवाइड कर छोटे-छोटे कमरे बना दिए गए हैं। एक अस्पताल में सर्जरी के रोगी के साथ ही मेडिसिन के रोगी को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। 

वहीं, उल्टी-दस्त के बीमार बच्चों को भी उसी वॉर्ड में भर्ती किया गया था। अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर नहीं थे। ओटी इतनी छोटी थी कि अगर उसमें एक डॉक्टर, दो नर्स और एक वॉर्ड बॉय चला जाए तो ओटी में हिलने की जगह नहीं रहती है।
 

टीम ने बच्चों के लिए खुले अस्पतालों में भर्ती रोगियों से पूछताछ की तो बताया कि बच्चे का वजन कम था इसलिए भर्ती किया। किसी ने बताया कि बच्चे को बुखार आ रहा था। इसलिए भर्ती कराया। अस्पताल जितने छोटे उनकी फीस उतनी ही ज्यादा है। भर्ती बच्चों के परिजनों ने बताया कि 50,000 रुपये फीस ली और बच्चे को पांच दिन भर्ती रखा। डॉक्टर को फोन कर बुलाया जाता है तब डॉक्टर आते हैं। 

 

स्टाफ रहता है। एक अस्पताल के स्टाफ ने प्रबंधक से मिलवाया तो उन्होंने कहा कि हमारे यहां फोन करने पर डॉक्टर आ जाते हैं। नर्सें रहती हैं। एनआईसीयू को लेकर कहा कि डॉक्टर देखते हैं। जब बच्चे की हालत बहुत गंभीर हो जाती है तो उसे दूसरी जगह रेफर कर देते हैं।

 

535 अस्पताल 50 बेड से कम और 60 अस्पताल 50 बेड से अधिक पंजीकृत
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, शहर में 535 अस्पताल 50 बेड से कम और 60 अस्पताल 50 बेड से अधिक पंजीकृत हैं। अकेले कल्याणपुर के न्यू शिवली रोड, नौबस्ता, चकेरी जैसी जगहों पर 700 सौ से ज्यादा अस्पताल एक से दो कमरों में संचालित हो रहे हैं।

 

रास्ते में बिछा दिए बेड
एक अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले रोगियों के लिए गेट से लेकर अंदर जाने तक के लिए कोई रास्ता नहीं है। रास्ते में ही बेड बिछा दिए गए। एचडीयू व आईसीयू में तीन से चार बेड पर एक स्टाफ है। यह आईसीयू के अलावा सामान्य रोगियों को भी देख करता है। ओटी में एयर फिल्टर सिस्टम नहीं लगा मिला। ओपीडी के लिए कोई जगह नहीं मिली।

 

अभियान चलाकर सभी अस्पतालों की होगी जांच
अभियान चलाकर सभी अस्पतालों की जांच की जाएगी। वह गंभीर रोगों के लिए कोई विशेष सुविधा जैसे आईसीयू, एनआईसीयू आदि संचालित कर रहे हैं तो अनुमति पत्र देखा जाएगा। बिना लाइसेंस अस्पताल संचालित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। - डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ

 
विज्ञापन

अस्पतालों की मांगी सूची
सीएमओ से पंजीकृत अस्पतालों की सूची मांगी गई है। वह मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों की जांच टीम गठित कर अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की जांच कराएंगे और कार्रवाई की जाएगी। - जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें