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यूपीः परिजनों ने नहीं बनने दिया शौचालय तो महिला ने किया आत्मदाह, जलालत से थी तंग

Thu, 06 Dec 2018 08:16 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मृतका के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के फतेहपुर जिले में दो मासूम बच्चों को खूंटे में बांधकर नित्य क्रिया के लिए खेत जाने की जलालत से बचने को विवाहिता अपना शौचालय बनवा रही थी। लेकिन परिजनों के विरोध के आगे उसकी एक न चली। इससे क्षुब्ध होकर महिला ने गुरुवार को केरोसिन डालकर आत्मदाह कर लिया। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच की बात कह रही है। घटना ललौली थाना क्षेत्र के दतौली गांव की है। 
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गांव निवासी रामबहादुर की पत्नी गुड़िया देवी (35) बुधवार सुबह करीब दस बजे घर में शौचालय का गड्ढा खुदवा रही थी। पति रामबहादुर ने बताया कि गुड़िया उससे बार-बार कहती थी कि भाई बउवा, राम सिंह, लल्ला सिंह और मां कुसुमा देवी उसे घर में बने शौचालय में नहीं जाने देती हैं। उसे दो मासूम बच्चे दीपिका (7) और शिवम (5) को खूंटे में बांधकर शौच क्रिया के लिए जंगल जाना पड़ता था।

भाइयों का रुख भांपकर वह प्रधान को बुलाने चला गया

मृतका के परिजन - फोटो : अमर उजाला
काफी दिनों से वह अपने खर्च पर शौचालय बनवाना चाह रहे थे, लेकिन भाइयों और मां के विरोध के चलते निर्माण रुका था। पति ने बताया कि वह दिवाली पर सूरत से लौटा था। शिकायत पर प्रधान ने पंचायत कर शौचालय बनाने को कहा था।

बुधवार को भाई उसे और पत्नी को जान से मारने के लिए कुल्हाड़ी लेकर दौड़े। भाइयों का रुख भांपकर वह प्रधान को बुलाने चला गया। इसी बीच पत्नी ने आग लगा ली। उसे इलाज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। रात में मौत हो गई। सूचना पर मायके हमीरपुर जिले के सिजनौड़ा गांव से मां और बहनें पहुंचीं।
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महिला अपने खर्चे से शौचालय बनवाना चाह रही थी

मृतका के परिजन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि गुड़िया ने कई बार अपने हिस्से में शौचालय बनवाने का प्रयास किया था। ससुरालीजन राजी नहीं होते थे। कई बार गुड़िया के साथ मारपीट कर चुके थे। एसओ राजेश मौर्या ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह ने बताया कि परिवार का बंटवारा अभी नहीं हुआ है। मृतका की सास कुसुमा के नाम एक शौचालय पहले से है। ऐसे में दूसरा शौचालय देने की कोई तुक नहीं है। महिला अपने खर्चे से शौचालय बनवाना चाह रही थी। इनका पारिवारिक विवाद है। वह इन दिनों चार दिन से बाहर हैं। किन हालात में आग लगाई गई, इसके बारे में उन्हें नहीं मालूम।    
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