मुकदमा संख्या से जानकारी करने पर पता चला कि इस नंबर की फाइल अपर जिला जज 26 की अदालत में चल रही है लेकिन वह धारा 306 थाना महाराजपुर से संबंधित है और इसमें आरोपी भी विपिन उर्फ नवाब है। फर्जी वारंट जारी होने की जानकारी पर सोनू को तो निजी मुचलके पर कोर्ट ने रिहा कर दिया।
वहीं मामले की जांच शुरू की गई, तो पता चला कि वारंट कार्यालय लिपिक ने नहीं तैयार किया। उसकी राइटिंग नहीं मिली और न ही उसके हस्ताक्षर थे। वारंट पर जज के हस्ताक्षर और न्यायालय की मोहर भी फर्जी लगी थी। एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि फर्जी गिरफ्तारी वारंट 22 दिसंबर 2022 को जारी किया गया।
24 दिसंबर से अदालतों में शीतकालीन अवकाश होना था। फर्जी वारंट बनाने वाले शातिर का इरादा था कि छुट्टी के दौरान सोनू की गिरफ्तारी होगी और रिमांड कोर्ट सोनू को जेल भेज देगी। 2 जनवरी को अदालत खुलने के बाद ही सोनू की रिहाई हो सकेगी।