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बेटे को बचाने में उजड़ा परिवार

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नई दिल्ली/उन्नाव। गोकुलपुर गांव की झुग्गियों को जिस समय आग की लपटों ने घेरा तो उन्नाव के फाजिलपुर गांव निवासी बबलू का पूरा परिवार सुरक्षित बाहर निकल आया था, लेकिन अगले ही पल परिवार जान जोखिम में डालकर फिर से मौत के मुंह में कूद गया। परिवार का कोई सदस्य घर का सामान तो कोई अमित उर्फ शहंशाह को खोजने में लग गया। इसी में परिवार के पांच लोग काल के गाल में समा गए।
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मृतक बबलू की बहन रबीना ने बताया कि जिस समय आग लगी तो शोर सुनकर परिवार की आंख खुली। घबराकर सभी लोग बाहर की ओर दौड़े। इस बीच परिवार के लोगोें ने पाया कि बबलू का बेटा शहंशाह अंदर ही फंस गया है। वहीं, घर के कीमती सामान की भी घरवालों को फिक्र होने लगी। साथ रहने वाले अन्य लोगों ने बहुत समझाने की कोशिश भी की, परंतु परिवार के लोगों का दिल नहीं माना। इस दौरान बबलू समेत परिवार के अन्य लोग जलती हुई झुग्गियों में कूद गए। बबलू शहंशाह-शहंशाह चिल्लाता हुआ आग के बीच कूद गया। दुर्भाग्य रहा कि आग ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। किसी तरह रबीना और संगीता ने मां मुन्नी और पिता रज्जन को बाहर निकाला। भाई सुजीत भी भागता हुआ बाहर आया। अन्य भाई-बहन की चीखें काले धुएं और आग की लपटों के पीछे रह गई और चंद लम्हों में सब कुछ खत्म हो गया।
शादी के लिए जोड़े रुपये और जेवर भी राख
रबीना ने बताया कि बहन रेशमा की शादी अगले माह तय थी। शादी गांव में धूमधाम से करने के लिए भाई-बहनों ने एक-एक पाई जोड़कर करीब ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया था। इसमें से कुछ रुपयों के आभूषण व अन्य सामान खरीदकर घर में रख लिया था। सब राख हो गया।
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दो दिन पहले का टिकट होता तो बच जातीं पांच जानें
उन्नाव स्थित फाजिलपुर गांव जाने के लिए यदि दो दिन पहले का टिकट होता तो भाई-बहन, भाभी और भतीजा जिंदा होते। अनहोनी ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। दिल्ली के गोकलपुर गांव में अग्निकांड में अपने परिवार को खोने वाली रज्जन की दोनों बहनें रबीना और संगीता यह कहते हुए बार-बार बेहोश हो जातीं।
उन्होंने बताया कि होली को लेकर घर में तैयारियां चल रही थीं। परिवार का मन इस बार की होली उन्नाव स्थित फाजिलपुर गांव में जाकर मनाने का था। सप्ताह भर से भाई-बहन, बच्चों और माता-पिता के लिए कपड़े समेत अन्य चीजों की खरीदारी कर रहे थे। रोज गांव में रहने वाले परिजनों से जल्द गांव पहुंचने को लेकर चर्चा होती थी। लेकिन आग ने खुशियों को खत्म कर दिया। रज्जन के परिवार में पत्नी मुन्नी देवी, बेटे बबलू, सुजीत और रंजीत और चार बेटियां रीमा, रबीना, संगीता और रेशमा थे। रज्जन और बबलू मजदूरी करते थे। पांच-छह माह पूर्व सुजीत ने प्रियंका से प्रेम विवाह किया था। प्रियंका चार माह की गर्भवती थी। हादसे में रज्जन की झुग्गी जलने से उसके बेटे बबलू (30), रंजीत (17), बेटी रेशमा (16), बेटे सुजीत की गर्भवती पत्नी प्रियंका (22) और बबलू के बेटे अमित उर्फ शहंशाह (11) के अर्द्ध जले शव निकाले गए।
एक साथ पांच मौत से परिवार उजड़ गया है। परिजनों ने बताया कि गांव में बबलू की पत्नी नीलम और एक बेटा अंकुश है। बबलू प्रतिदिन कभी वीडियो कॉल तो कभी फोन कॉल के माध्यम से परिवार का हाल लेता था। वह जल्द से जल्द उनके पास पहुंचने की बात करता रहता था। नीलम की तबियत ठीक नहीं रहती है। यही वजह थी कि गांव पहुंचने के लिए बबलू तत्परता से टिकट कराना चाहता था, लेकिन ट्रेन में आरक्षित सीट नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में रविवार का टिकट कराना पड़ा। गांव जाने के लिए बबलू ने सभी छह भाई-बहनों, बेटे और माता-पिता का टिकट बुक कराया था। यदि टिकट पहले हो जाता तो यह परिवार बच जाता।
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