ऐसे की गई हेराफेरी
कोरोना की दूसरी लहर में न्यूरो साइंसेज विभाग में लेवल थ्री का अस्पताल बनाया गया है। यहां भर्ती संक्रमित मरीजों की देखरेख में लगे डॉक्टर द्वारा प्रतिदिन दवाओं का पर्चा (स्टोर का मांगपत्र) बनाकर दिया जाता है। इस पर नर्सिंग स्टाफ या वार्ड ब्वॉय स्टोर से दवा लेकर आता है। मांग पत्र में मरीज के नाम, भर्ती होने की तारीख, आईपी नंबर के साथ डॉक्टर भी का नाम लिखा होता है। दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नर्सिंग स्टाफ ने कोविड मरीज की मौत के बाद भी स्टोर से रेमडेसिविर निकलवाई।
रजिस्ट्रेशन नंबर नाम एडमिट मौत इंजेक्शन जारी करने की तिथि
688 शिवम 19-04 23- 04 25-04
702 प्रहलाद सिंह 22- 04 26-04
704 निर्मला खरे 19-04 22-04 26-04
750 नाजिया खान 25-04 26- 04 27-04
617 राजतिलक 26- 04 29-04
751 रामदास 20-04 28- 04 29-04
788 विनीता ठाकुर 23-04 26- 04 02-05
हैलट में मरीजों के लिए प्रतिदिन दवाओं को इंडेंट कराया जाता है। इसके बाद भी यदि कोरोना काल में किसी मरीज की मौत के बावजूद उसके नाम पर इंजेक्शन आवंटित किए गए हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. ज्योति सक्सेना, प्रमुख चिकित्साधीक्षक, हैलट