सभी को चार-चार सहायक आयकर निदेशक या उप आयकर निदेशक मिले हैं। केवल कानपुर और नोएडा के अधिकारी अपने-अपने शहरों में ही तैनात हैं। बाकी जगहों के एक-दो अधिकारियों के पास दूसरे शहरों की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में छोटे शहरों की निगरानी नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय से छोटे शहरों में कर चोरी बढ़ी है। रियल इस्टेट, पान मसाला, गुटका समेत अन्य कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। झांसी में पिछले साल एक रियल इस्टेट कारोबारी के यहां छापे में दो सौ करोड़ की कर चोरी पकड़ी गई थी।
कन्नौज और कानपुर में रहने वाले पीयूष जैन के आवासों से दो सौ करोड़ से ज्यादा की नकदी और सोने की सिल्ली मिली थी। ऐसे मामले सामने आने के बाद विभाग ने छोटे शहरों की भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। सूत्रों के अनुसार सीबीडीटी जल्द ही जांच शाखा बढ़ाने जा रहा है। इसके साथ ही संयुक्त आयकर निदेशक से संबद्ध सहायक और उप आयकर निदेशक की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। इससे प्रदेश के बांदा, कन्नौज, महोबा, हमीरपुर, कानपुर देहात, उरई, रायबरेली, मिर्जापुर, बुलंदशहर, मथुरा, अयोध्या जैसे जिलों को जांच शाखा का आयकर अधिकारी मिल सकता है।