वह सरवनखेड़ा ब्लाक कार्यालय के पास छह हजार रुपये प्रति माह किराये पर जमीन लेकर मिट्टी के बर्तन व कलात्मक सजावटी सामान बनाता है। उसे खादी ग्रामोद्योग से वर्ष 2019 में 5 लाख रुपये ऋण मिला। उसने इन पैसों से मिट्टी पिसाई मशीन, जनरेटर व सांचा आदि खरीदा। इधर, माटी कला बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर प्रजापति की पहल पर कलात्मक दीयों की मांग सीएम व कैबिनेट मंत्रियों ने की। शिवम् कहते हैं कि 21 सौ कलात्मक दीयों की खेप लखनऊ भेजी गई है।
प्राइवेट नौकरी छोड़ चुना खुद शुरू किया काम
शिवम कहते हैं कि पिता कानपुर की एक फैक्टरी में काम करते थे। नौकरी छूटने पर आर्थिक दिक्कतें आई तो घर पर किराना दुकान की गई। उसने बीएससी तक पढ़ाई की। निजी अस्पताल में नौकरी की। एक दिन एक रिश्तेदार के यहां मिट्टी के बर्तन बनते देखकर खुद का काम करने की इच्छा हुई। वह नौकरी छोड़कर खुद का काम चुना। शादी समारोह में मिट्टी के कुल्हड़ की खूब मांग है। प्रति माह दस से पंद्रह हजार रुपये की आमदनी होती है। कुछ बचत भी हो जाती है।
इस दीपावली पर शिवम् के हाथों बने मिट्टी के कलात्मक दीये सीएम व अन्य कैबिनेट मंत्रियों के आवास पर रोशनी करेंगे। 21 सौ दीये शिवम् ने भेजें हैं। इसमें से पांच सौ दीये सीएम आवास व अन्य दीये कैबिनेट मंत्रियों के यहां दीपावली पर जलाए जाएंगे।
धर्मवीर प्रजापति, माटी कला बोर्ड, चेयरमैन