प्रधान अमीरुद्दीन व उनके पूरे परिवार की मुस्लिम होने के बावजूद इस मंदिर पर अटूट आस्था है। इस बारे में जब ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ग्रामपंचायत के चुनावों से पहले उन्होंने यह कार्यक्रम कराने की मन्नत मानी थी जिसे पूरी की है।
कौमी एकता की ऐसी मिसाल कभी कभार ही देखने को मिलती है। जिसमें रुढ़िवादी धार्मिक परम्पराओं की बेड़ियों को तोड़ अपने धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों को भी मान्यता दी जाए। ऐसी ही मिसाल पेश की है क्षेत्र के बांधुर बुजुर्ग प्रधान अमीरुद्दीन ने। बीते शुक्रवार व शनिवार को प्रधान ने व्यक्तिगत तौर पर गांव के संकट मोचन धाम (हनुमान मंदिर) में अखंड रामायण पाठ का आयोजन कराया।
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वहीं कन्या भोज के साथ भंडारे का आयोजन किया गया। बता दें कि वैसे तो इस गांव के संकट मोचन धाम में हर किसी की अटूट श्रद्धा है। लेकिन प्रधान अमीरुद्दीन व उनके पूरे परिवार की मुस्लिम होने के बावजूद इस मंदिर पर अटूट आस्था है।
इस बारे में जब ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ग्रामपंचायत के चुनावों से पहले उन्होंने यह कार्यक्रम कराने की मन्नत मानी थी जिसे पूरी की है। बताया कि उनकी इस धार्मिक स्थल पर अटूट आस्था है और बीते साल 2015 में जब उनके बेटे की पुलिस में नौकरी लगी थी तब भी उन्होंने यहां अखंड रामायण पाठ व कन्या भोज का आयोजन कराया था। बताते चलें कि इसी धार्मिक सौहार्द्र के चलते अमीरुद्दीन गांव के तीसरी बार प्रधान चुने गए हैं।