इटावा जिले में सफारी रोड पर मुख्य सड़क से लगभग एक किलोमीटर अंदर बीहड़ में बनी दरगाह 0.0281 हेक्टेयर परिसर में बनी हुई है। यह जमीन वन विभाग की है। इस दरगाह पर तीन और चार फरवरी को उर्स प्रस्तावित है। इस बीच प्रशासन और वन विभाग की ओर से उसके अस्तित्व की कराई जा रही जांच दरगाह से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए कौतुहल बना हुआ है।
वन विभाग की ओर से दरगाह तक जाने वाले रास्ते पर बड़े-बड़े पांच गड्ढ़े करा दिए जाने के बावजूद लोग शनिवार को कई श्रद्धालु वहां दरगाह की स्थितियों को देखने पहुंचे। वहीं प्रस्तावित उर्स को लेकर पुलिस भी सतर्कता बरत रही है। टीटी चौकी पुलिस ने दरगाह पर पहुंचकर जांच की। वहां मौजूद लोगों के भी बयान लिए हैं। बाइस ख्वाजा रोड जहां सफारी रोड पर मिलता है।
बीहड़ में बनी दरगाह में ऊपर जाकर बनी एक मजार
- फोटो : amar ujala
अभी तक रास्ते पर चली जाती थी बाइक और कार
वहीं, मुख्य सड़क से एक कच्चा रास्ता दरगाह की ओर जाता है। करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित यह दरगाह है। दरगाह की ओर जाने वाला रास्ता जंगल के झाड़-झंगाड़ काटकर बनाया गया है। शुरुआत में यह रास्ता पांच से सात फीट चौड़ा होगा, लेकिन जैसे-जैसे अंदर बढ़ते जाते हैं…रास्ता चौड़ा हो जाता है। अंदर क्षेत्र में रास्ते को 10 से 12 फीट चौड़ा तक बना रखा है। अभी तक इस रास्ते पर बाइक और कार चली जाती थी।
बीहड़ में बनी दरगाह में ऊपर जाकर बनी एक मजार
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जांच शुरू होने से श्रद्धालुओं में दरगाह जाने की रही बेचैनी
लेकिन अब शिकायत के बाद वन विभाग की ओर से पूरे रास्ते में पांच गड्ढ़े खोदवा दिए गए हैं। हालांकि वन विभाग का दावा है कि वह सुरक्षा खाई होती हैं। आम आदमी जंगल में न जा सके इसके लिए यह बनवाई जाती है। दरगाह को लेकर जांच शुरू होने और नोटिस चस्पा होने की जानकारी इस दरगाह से जुड़े श्रद्धालुओं को हुई, तो उनमें दरगाह जाने की बेचैनी रही। शनिवार दोपहर कुछ युवा और कुछ बुजुर्ग लोग दरगाह पर गए।
दरगाह के लिए जाने वाले रास्ते पर खोदे गए गड्ढ़े
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पुलिस की ओर से अभी कोई जांच नहीं कराई जा रही
यहां उन्होंने इबादत की। तीन और चार फरवरी को प्रस्तावित उर्स को लेकर पुलिस भी सतर्क हो गई है। शनिवार को टीटी चौकी प्रभारी ने दरगाह पर जाकर जांच की। यहां आए लोगों के बयान लिए। उन्हें जागरूक किया कि दरगाह से जुड़े श्रद्धालुओं को अवगत करा दिया जाए कि अभी उर्स की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में यहां न आएं। एसएसपी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि चूंकि उर्स की सूचना है ऐसे में सामान्य रूप से चौकी पुलिस जांच करने गई थी। फिलहाल पुलिस की ओर से अभी कोई जांच नहीं कराई जा रही है।
दरगाह के लिए जाने वाला कच्चा रास्ता
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डीएफओ कोर्ट में चलेगा वाद
डीएफओ विकास नायक ने बताया कि नोटिस का जवाब आ गया है। अब इस मामले में डीएफओ कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी। रेंजर की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट और सामने के पक्ष की ओर से दिए गए पक्ष को सुनने के बाद का आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल वन विभाग के दस्तावेजों में कहीं पर भी दरगाह नहीं है।
बीहड़ में बनी दरगाह
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45 साल से आ रहा दरगाह पर, अब्बा भी आते थे
शनिवार को दरगाह पर आए अब्दुल कादिर निवासी अकालगंज पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र लगभग 55 वर्ष है। वह 10 साल की उम्र से अपने अब्बा के साथ दरगाह पर आते हैं। बताया कि उनके अब्बा भी इस दरगाह पर आते थे। बताया कि यहां उनकी सभी मन्नतें पूरी होती हैं। जुमे रात पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं। बताया कि साल में एक उर्स भी होता है। इसमें आसपास के कई जिलों के लोग शामिल होने के लिए आते हैं।
बीहड़ में बनी दरगाह
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दो साल से हर जुमा रात में आते हैं दरगाह पर
गाड़ीपुरा निवासी अल्ताफ भी शनिवार को अपने दोस्तों के साथ दरगाह पर आए हुए थे। उन्होंने बताया कि वह लगभग दो साल से निरंतर जुमे रात को दरगाह पर आते हैं। यहां पक्षियों को दाना चुंगाते हैं और इबादत करते हैं। बताया कि शहर ही के नहीं, बल्कि आसपास के कई जनपदों के लोग इस दरगाह पर आते हैं। बताया कि उर्स इस बार तीन और चार होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब उर्स होगा या नहीं यह अभी पता नहीं।
दरगाह के कच्चे रास्ते पर पुलिस
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दरगाह स्थल पर बनी हैं दो मजारें
दरगाह स्थल पर एक मजार नीचे बनी हुई है। बाहर बड़ा सा चबूतरा है। इसमें आठ-नौ पिलर बने हुए हैं। इसके पास में ही एक ऊपर जाने के लिए रास्ता बना है। इसमें लगभग 25 सीढि़यां हैं। ऊपर जाने के बाद एक और मजाद बनी हुई है। देखकर लगता है जैसे वह मजार पहले की है। मौके पर शनिवार को मिले अब्दुल कादिर ने बताया कि नीचे जो स्थान बना है वह यहां आने वाले श्रद्धालुओं के चंदे से बना है।
चस्पा नोटिस
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लगभग साढ़े आठ सौ साल पुरानी दरगाह होने का दावा
इस दरगाह के व्यवस्थापक के तौर पर जुड़े मुस्तकीम राईप ने बताया कि इस दरगाह का कोई लिखित में इतिहास तो नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह दरगाह लगभग आठ सौ साल पुरानी है। बताया कि दरगाह को बीहड़ वाले शहीद बाबा के नाम से जाना जाता है। बताया कि 52 वर्षों से यहां उर्स का आयोजन किया जा रहा है। इसमें हमेशा पुलिस-प्रशासन का सहयोग रहा है। बताया कि वन विभाग को नोटिस का जवाब दे दिया गया है। प्रशासन से आग्रह किया जाएगा कि उर्स की अनुमति दी जाए।