डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध सरकारी और गैर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब आईआईटी की तरह च्वाइस्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) की पढ़ाई, परीक्षा कराई जाएगी।
हर सेमेस्टर की परीक्षा में ग्रेड मिलेंगे, फिर फाइनल ईयर का ग्रेड प्वाइंट निकाला जाएगा। कुल ग्रेड प्वाइंट 10 का रहेगा। इस पर कुलपति प्रो. विनय पाठक ने मुहर लगा दी है। यह व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2016-17 से लागू होगी। अभी तक इंजीनियरिंग कॉलेजों की पढ़ाई में मार्क्स दिए जाते हैं।
हर पेपर 50 या फिर 100 मार्क्स का होता है। रविवार को एचबीटीआई में बायो डीजल पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने आए टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति ने कहा, कि टेक्निकल यूनिवर्सिटी की पढ़ाई और पेपर का पैटर्न अगले सत्र से बदला जाएगा। पढ़ाई च्वाइस्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से होगी।
अनुशासन, सब्जेक्ट पर पकड़, खेल-कूद और एक्स्ट्रा कॅरिकुलर एक्टिविटी को भी ग्रेडिंग में शामिल किया जाएगा। इसका बड़ा फायदा यूपी के सभी इंजीनियरिंग स्टूडेंटों को मिलेगा। वह विदेश जाकर आसानी से परास्नातक (मास्टर) और रिसर्च कर सकेंगे। अभी तक ऐसा नहीं हो रहा। विदेश जाने से पहले ट्रांसक्रिप्ट (सभी कक्षाओं के मार्क्स का ब्योरा) बनवाने और छह महीने का प्रशिक्षण लेना पड़ता है।
कुलपति का कहना है कि टेक्निकल यूनिवर्सिटी कैंपस लखनऊ में ही सत्र 2016-17 से एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट इन डिजाइन की स्थापना की जाएगी। नोएडा में डिजाइन इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। इस फैसला हो चुका है। उन्होंने कहा कि एचबीटीआई अब यूनिवर्सिटी बन रही है। इसकी शोध और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई जानी चाहिए। एचबीटीआई के पास पर्याप्त सुविधा-संसाधन हैं, जिसकी मदद से बायो डीजल पर रिसर्च किया जा सकता है।