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महिलाओं की प्रतिभा दबी तो सिरदर्द

Sun, 22 Nov 2015 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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जिन महिलाओं की प्रतिभा दबी रह जाती है, उनमें सिरदर्द की शिकायत ज्यादा होती है। उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप काम करने का माहौल मिले तो सिरदर्द खत्म हो सकता है। बातें करने, टहलने और योगा करने से भी सिरदर्द में राहत मिलती है।
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यह निष्कर्ष निकला नेशनल हैडेक (सिरदर्द) अपडेट 2015 में विशेषज्ञों की बातचीत से। शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित कांफ्रेंस का उद्घाटन वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. देविका नाग ने किया। विशिष्ट अतिथि सीएसजेएमयू के वीसी प्रो. जेवी वैशंपायन रहे।

केजीएमयू लखनऊ के प्रो. राकेश शुक्ला ने कहा, ‘दर्द-ए-सिर में चंदन दिलाता है सुकून, पर नवाब साहब चंदन भी लगाने में सिरदर्द महसूस करते हैं’। फोर्टिस गुड़गांव के डॉ. आरके गुप्ता, कोलकाता के डॉ. श्यामल दास, डॉ. आशीष दास, गंगाराम अस्पताल के डॉ. प्रवीण, केजीएमयू के डॉ. अनिल निश्चल, डॉ. दीप्त विभा भट्ट, एम्स, नई दिल्ली, डॉ. विमल पालीवाल, एसजी पीजीआई लखनऊ, डॉ. हरदीप सिंह, केजीएमयू लखनऊ, डॉ. सुमित सिंह, मेदांता ने जानकारी दी।
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