कानपुर। अमेरिका की ओर से टैरिफ और एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले का प्रभाव तकनीकी संस्थानों के प्लेसमेंट पर दिखाई दे सकता है। एक दिसंबर को शुरू होने वाला आईआईटी कानपुर का प्लेसमेंट भी इससे प्रभावित हो सकता है।
इससे पहले पूर्व अनुमानों के चलते आईआईटी में प्री-प्लेसमेंट में भी गिरावट आई। छात्रों ने भी कंपनियों के ऑफरों को स्वीकार नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से अमेरिकी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ेगा जिसका असर विदेशी भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। हालांकि भारत को इसका लाभ भी मिलेगा कारण कई बहुराष्ट्रीय कंपनी (एमएनसी) अब भारतीय छात्रों को हायर करने के लिए देश में अपने ऑफिस खोल रही हैं।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से मार्केट में चल रही उथल पुथल का असर अब कैंपस प्लेसमेंट में नजर आने वाला है। भले ही आईआईटी कानपुर सहित अन्य तकनीक संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय ऑफर्स का प्रतिशत सीमित है लेकिन इसका दोहरा प्रभाव पड़ेगा।
आईआईटी कानपुर का प्रथम चरण का प्लेसमेंट एक दिसंबर से शुरू हो जाता है। 15 दिन चलने वाले इस प्लेसमेंट में 250 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है। पिछले साल करीब 25 छात्रों को अंतरराष्ट्रीय पैकेज ऑफर भी हुए थे।
इस बार की स्थितियां बिल्कुल विपरीत हैं। पीएसआईटी के ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ और एच-1बी वीजा का दोहरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्लेसमेंट के लिए आने वाली कंपनियों ने अपनी प्रक्रिया धीमे रखी है। वह रुको और देखो वाली स्थिति में हैं।
वीजा फीस में वृद्धि के चलते कंपनियां भारत से सीधे अमेरिकी जॉब रोल्स देने में सतर्कता बरत सकती हैं। यूएस एमएनसी मिलने वाले प्रोजेक्ट कॉस्ट के आधार पर ही छात्रों कि नियुक्ति करने के मूड में है। इससे प्लेसमेंट में कमी आ सकती है।
उन्होंने उदाहरण के रूप में समझाया कि मान लें अगर कोई कंपनी 100 छात्रों को हायर करती है तो अब वह 40 युवाओं को जॉब देने के मूड में है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि हालांकि कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां अधिक भारतीय छात्रों को जॉब दे सकें इसके लिए वह देश में अपनी शाखाएं खोल रही हैं। इससे निश्चित ही भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस बार प्लेसमेंट में अधिकांश छात्रों के लिए देश के भीतर ही बेहतर अवसर उपलब्ध रहेंगे। आईटी, शोध और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में घरेलू कंपनियां और भारत स्थित एमएनसी की भर्ती गतिविधियां सामान्य गति से जारी रहने की संभावना है। हालांकि आईआईटी कानपुर के प्लेसमेंट ऑफिस ने इस पर कोई भी अधिकारिक टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।
प्री प्लेसमेंट में दिखा है प्रभाव
आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजार में उठापटक का असर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के प्री-प्लेसमेंट ऑफरों में दिखाई दिया है। सामान्यत प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) को सुरक्षित माना जाता है लेकिन मार्केट की अनिश्चितता के चलते इस बार छात्रों की बढ़ती संख्या अंतिम प्लेसमेंट का रुख कर रही है। कारण पीपीओ में बैठने वाले छात्रों को प्लेसमेंट प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है। भर्ती का फोकस एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व जैसे विविध बाजारों की ओर बढ़ रहा है।