कानपुर। एचबीटीयू में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि अपशिष्ट को बायोगैस में बदलने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि किसान अब फसलों के अपशिष्ट को खेतों में जलाने के बजाय उनको बायोगैस प्लांट में देकर पैसा कमा सकते हैं।
आवासीय इलाकों में किचन वेस्ट से ऊर्जा प्राप्त करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में बायोगैस उन्नयन और शुद्धिकरण प्रौद्योगिकियों पर गैसकान इंजीनियर्स के निदेशक एमएल धीमान ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बायोगैस प्लांट में तैयार होने वाली गैस को एक से दूसरे स्थान तक ले जाने में शुद्धीकरण का ध्यान रखना होगा।
अगर गैस की गुणवत्ता अच्छी नहीं होगी तो उद्योगों से लेकर वाहनों तक इसके प्रयोग की संभावना कम हो जाएगी। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के चेयरमैन और आईआईएम अहमदाबाद के गेस्ट फैकल्टी गौरव केडिया ने बताया कि खेतों के अलावा रसोई के कचरे और अन्य वनस्पतियों से भी गैस मिल रही है।
जिसे कंप्रेस्ड करने के बाद पीएनजी और सीएनजी के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. सचिन कुमार ने किया। यहां डाॅ. रोमा अग्रहरी, श्रीनिवास कसुला, महेंद्र ठाकुर मौजूद रहे।