आंतों की गति भी होती है प्रभावित
इससे इन बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ जाता है। शत्रु बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं। गट बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ने पर आंतों में वायरल संक्रमण होने लगता है। इसकी वजह से आंतों में एंजाइना होता है। इसके अन्य कारण भी होते हैं। इनमें मुख्य खानपान में गड़बड़ी, पानी कम पीना आदि हैं। जाड़े में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि ठंड में लोगों के पानी कम पीने से भी गट फ्लोरा कमजोर होने लगता है। इससे आंतों पर नकारात्मक प्रभाव आता है। पानी कम होने से आंतों की गति भी प्रभावित होती है। गट फ्लोरा के कमजोर पड़ने से वायरस सक्रिय हो जाते हैं।
ऐसे होता है गैस्ट्रिक एंजाइना
जाड़े में तापमान बनाए रखने के लिए शरीर खून की आपूर्ति त्वचा की रक्तवाहिनियों में बढ़ा देता है। इससे आंतों में रक्त की आपूर्ति घट जाती है। हृदय की तरह ही आंतों की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से शरीर के बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ जाता है और शत्रु बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं। इन्हें गट फ्लोरा कहते हैं। इससे आंतों की गति प्रभावित हो जाती है और संक्रमण बढ़ता है। आंतों में दर्द उठने लगता है।
कम धूप होने से भी दिक्कत होती आंतों में
डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि धूप के घंटे कम होने और सीजनल बदलाव से भी तनाव बढ़ जाता है। इससे शरीर में कॉर्टिसॉल हार्मोन का रिसाव होने लगता है। इससे आंतों के मित्र बैक्टीरिया पर नकारात्मक प्रभाव आता है। आंतों का संचलन प्रभावित होता है और वायरस सक्रिय हो जाते हैं। धूप मिलने पर डोपामीन हार्मोन रिसता है। इससे स्ट्रेस खत्म होता है और आंतों में गति आती है। नियमित व्यायाम से भी गट फ्लोरा में ताकत आती है।