अधिक उम्र में शादी करने पर होने वाले बच्चों में विभिन्न शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचाव के लिए युवतियां शादी से पहले ही अपने अंडाणु फ्रीजर में सुरक्षित करवा रही हैं। इससे देर से शादी करने पर जब इन अंडाणुओं का इस्तेमाल किया जाएगा तो शिशु में मंदबुद्धिता, आटिज्म सरीखी बीमारियों का खतरा नहीं रहेगा।
लीलावती मुंबई और फोर्टिस दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश पाई ने बताया कि उनके पास अब तक करीब चार हजार युवतियां अपने अंडाणु फ्रीजर में सुरक्षित करवा चुकी हैं। इस विधि को ऊसाइट्स विट्रिफिकेशन कहते हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इनफर्टिलिटी अपडेट एंड हाईरिस्क प्रेगनेंसी केयर-2019 में डॉ. पाई शिरकत करने आए थे। उन्होंने बताया कि कॅरियर बनाने के चक्कर में महिलाएं और पुरुष दोनों देर से शादी कर रहे हैं। देर से शादी होने पर महिलाओं में अंडाणुओं की संख्या और उनकी क्वालिटी घट जाती है।
युवावस्था के अंडाणु सेहतमंद रहते हैं। इससे बना भ्रूण भी सेहतमंद होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे पुरुष जो कॅरियर के चक्कर में 40 साल के बाद शादी करते हैं, वे अपने शुक्राणु पहले सुरक्षित करवा सकते हैं। बूढ़े बाप के बच्चों में आटिज्म सिंड्रोम का खतरा है।
प्रदूषण से शुक्राणु घटे, 60 करोड़ से 15 करोड़ बचे
प्रदूषण और मानसिक तनाव पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या घटा रहा है। कानपुर में सीनियर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पीसी महापात्रा ने बताया कि डब्ल्युएचओ के मानकों में पहले एक एमएल वीर्य में 60 करोड़ शुक्राणु न्यूनतम मानक रहा है। अब यह घटकर एक एमएल में 15 करोड़ हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण, मानसिक तनाव, माहौल में गर्मी अधिक बढ़ना, नशीले पदार्थों के सेवन आदि से पुरुषों में शुक्राणु की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसी तरह महिलाओं पर भी प्रदूषण और मानसिक तनाव का प्रभाव है। पॉलीसिस्ट ओवेरियन सिंड्रोम, एंडोमेट्रियोसिस आदि समस्याओं से महिलाओं में बांझपन की दिक्कत है।