अगर जरूरत न हो तो जरा सा दर्द होने पर पेन किलर दवाएं खाने की आदत न बनाएं, इससे गुर्दे खराब होते हैं। अगर खून की कमी (एनीमिया) हो रहा है तो एक बार किडनी की जांच जरूर करा लें। प्रदूषण के कारण कॉपर, आर्सेनिक, लेड आदि तत्व फेफड़ों में जाते हैं। इनके दुष्प्रभाव से भी गुर्दे खराब होते हैं।
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यह बात एसजीपीजीआई लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने कानपुर फिजिशियन फोरम के बैनर तले एनीमिया पर आयोजित सीएमई में बताई। उन्होंने कहा कि फल और सब्जियां उगाने में कीटनाशक के अधिक इस्तेमाल से लोगों के गुर्दे खराब हो रहे हैं। गुर्दे में अधिक खराबी आने के बाद पता चलता है, इसलिए जांच कराते रहें।
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कानपुर फिजिशियन फोरम के बैनर तले सीएमई का आयोजन जीटी रोड स्थित एक होटल में किया गया। डॉ. शर्मा ने बताया कि अगर हीमोग्लोबिन 10 ग्राम से कम हो तो फौरन डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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थोड़े काम में थकान होना, शरीर में एेंठन होना, सांस फूलना, पैरों में सूजन आना आदि खून की कमी के लक्षण हैं। मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी, फोरम के अध्यक्ष वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिन्हा, सचिव डॉ. कुनाल सहाय, डॉ. आर सहाय, डॉ. पी रामचंदानी आदि मौजूद रहे।
बचाव
- नियमित व्यायाम करें, सादा खाना खाएं
- ब्लडप्रेशर और डायबिटीज कंट्रोल रखें
- 40 साल की उम्र के बाद यूरिन एल्ब्युमिन की जांच कराते रहें
- हेवी मेटल वाली देसी दवाएं न लें
- बेवजह पेन किलर न खाएं, गुर्दों को बचाएं