कानपुर। सर्दियों में गर्म, मीठा, नमकीन और खट्टा सभी तरह का भोजन कर सकते हैं। इस मौसम में पेट की अग्नि तेज होती है जो भोजन को अच्छे से पचाती है। ये जानकारी गीतानगर आयुर्वेद चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. रवि कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि इस समय मौसमी सब्जियां, फल, गुड़, बाजरा, मक्का, अदरक, सोंठ और अलसी का सेवन जरूर करें। हालांकि एलर्जी वाले लोग, शुगर रोगी और अधिक वजन वाले लोग मीठे का सेवन सीमित करें। सर्दियों में भोजन को एक बार में न लें, बल्कि दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। लंच और डिनर के बीच लंबा अंतर न रखें, बीच में हल्का स्नैक लें। जूस की बजाय फलों को चबाकर खाएं। इस मौसम में देसी घी का सेवन लाभकारी है और रिफाइंड तेल की जगह मूंगफली का तेल प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि सुबह खाली पेट पानी पीना हर किसी के लिए सही नहीं है। अगर इससे एसिडिटी होती है तो बिना डॉक्टर की सलाह खाली पेट पानी न पीएं। भोजन पचने में परेशानी होने पर दो सौ एमएल पानी में तीन ग्राम सोंठ पाउडर मिलाकर इसे गर्म कर पी सकते हैं। सर्दियों में हल्का व्यायाम करें, गुनगुना पानी पीएं। गुनगुने पानी से नहाएं और पैर-कान-सिर ढककर रखें। सांस दमा के रोगी बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें। घर में आग जलाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
टॉयलेट सोप से न नहाएं, सरसों या नारियल तेल से करें मालिश
सर्दी के मौसम में खुजली, जलन के रोगी बढ़ जाते हैं। इसका कारण गर्म कपड़े पहनना और टॉयलेट सोप से नहाना होता है। माइल्ड सोप जैसे ग्लिसरीन युक्त साबुन से ही नहाएं और शरीर में सरसों या नारियल तेल की मालिश जरूरी करें। रोज सोते समय पैरों में गर्म तेल की मालिश करें। ऐसे लोग जिन्हें एलर्जी है वह गर्म कपड़े पहनने से पहले कॉटन के कपड़े पहनें। आयुर्वेदाचार्य डॉ. रविंद्र पोरवाल ने बताया कि नंगे बदन जमीन पर बैठकर पूजा-पाठ करने से बचें। कोहरे में टहलने न जाएं, इसके स्थान पर बंद जगह पर योग-क्रियाएं करें। बासी भोजन, ठंडा दूध, ठंडा पानी, दही, छाछ और फीज का भोजन न लें। केक, पेस्ट्री, जंक फूड, पूरी, परांठे, पकोड़े, चाट और समोसे से परहेज रखें।
शुगर रोगी आलू-शकरकंद छोड़कर सभी सब्जी खाएं
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि शुगर रोगी काजू, किशमिश, अंजीर नहीं खाएं। छह से सात बादाम व दो से चार अखरोट का सेवन करें। अमरूद, नाशपाती, सेब, पपीता खा सकते हैं। मूंगफली थोड़ी मात्रा में वो भी बिना नमक, हरी चटनी के खाएं। आलू-शकरकंद छोड़कर हर तरह की सब्जी का सेवन करें।
बच्चे - सभी तरह के मौसमी फल, मेवा खा सकते हैं। सलाद अधिक दें। दलिया, सूप, गाजर और शलजम का हलवा, मूंग दाल का चीला दें। बच्चे केले खा सकते हैं। बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज फायदेमंद होते हैं। जंक फूड से बचाव करें।
बुजुर्ग- स्वस्थ बुजुर्ग सब कुछ कम मात्रा में खा सकते हैं। दिन में एक गोंद का लड्डू भी खा सकते हैं। इसके अलावा दालें, सब्जी, रोटी का सेवन करें। शाम के समय चावल न खाएं। पर्याप्त पानी पिएं। साबुत अनाज खाएं।
युवा- कोल्ड ड्रिंक, जंकफूड न खाएं। देसी घी खाएं, सरसों के तेल में बना भोजन करें। भोजन में हरी सब्जी, सलाद, रोटी, चावल और दाल को शामिल करें। डाइट में फिश ले सकते हैं। दालें, फलियां व अंडे प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। गाजर, पालक, नारंगी जरूर खाएं।