शनिवार सुबह 11:43 बजे आए भूकंप को मैग्नीट्यूड स्केल पर 7.9 मापा गया। कानपुर में इसकी तीव्रता मरकली इंटेंससिटी स्केल (भूकंप की तीव्रता नापने का पैमाना) पर 4 मापी गई है। शहर में शनिवार को दिन भर 17 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। आईआईटी सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार 81 सालों के बाद इतना बड़ा भूकंप आया है।
करीब डेढ़ महीने तक भूकंप के और झटके लग सकते हैं। इन झटकों की तीव्रता काफी कम होगी लेकिन सतर्क रहने की आवश्यकता है। आईआईटी ने मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस को पत्र लिखकर काठमांडू जाने की अनुमति भी मांगी है ताकि भूकंप के कारकों के बारे में रिसर्च की जा सके।
शहर में शनिवार सुबह 11:43 बजे पहला और करीब 20 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस किया गया। पहला झटका 17 सेकेंड और दूसरा 14 सेकेंड तक रहा। इसके बाद झटकों का सिलसिला जारी रहा। लेकिन झटके हल्के होने से इसका आभास कम हुआ।
आईआईटी सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जावेद एन मलिक ने बताया कि 1934 के बाद कानपुर में इतनी तीव्रता का झटका महसूस किया गया है। इससे पहले 1934 में नेपाल में 8.1 तीव्रता का भूकंप आया था जिसका प्रभाव शहर में काफी महसूस किया गया था।
उन्होंने बताया कि इंडियन, यूरेशियन और तिब्बतियन प्लेट्स पर प्रेशर रिलीज होने की वजह से भूकंप आया है। आईआईटी सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर दुर्गेश राय ने बताया कि यह बड़ा भूकंप था। भूकंप को दो तरह से मापा जाता है।
पहला जो उसका केंद्र बिंदु है वहां से कितनी ऊर्जा रिलीज हुई, उसे मैगनीट्यूड रिक्टर पर मापा जाता है। दूसरा, भूकंप के बाद आस पास के इलाकों में किस तीव्रता में हलचल हुई है। इस प्रकार से भूकंप के केंद्र बिंदु से रिलीज हई ऊर्जा तो 7.9 है, लेकिन इसकी तीव्रता कानपुर आते आते 4 रह गई।
रॉय ने कहा कि कानपुर सिसमिक जोन थ्री में आता है, जो न ज्यादा सेफ है और न ही ज्यादा अनसेफ। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हल्के झटके लग सकते है, घबराने के बजाए केवल सतर्क रहने की आवश्यकता है। ये झटके डेढ़ महीने तक आते रहेंगे।
वहीं सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ अनिरुद्ध दुबे ने कहा कि भूकंप मौसम को भी प्रभावित करता है लेकिन इसका प्रभाव तुरंत न होकर दूरगामी होता है। जाहिर है कि शनिवार को आया भूकंप दूरगामी परिणाम देगा।