कानपुर देहात। चुनाव ड्यूटी निर्धारण में लापरवाही साफ नजर आ रही है। सेवानिवृत्त शिक्षकों की भी ड्यूटी लगा दी गई है। उनके पास ड्यूटी करने की सूचना पहुंच रही है तो वह परेशान हो रहे हैं। दिव्यांग शिक्षकों को पीठासीन की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे दिव्यांग शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाई है जो खुद वैशाखी के सहारे चलते हैं। ऐसे में वह पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन कैसे करेंगे इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
दिव्यांगों को चुनाव ड्यूटी से दूर रखा जाता है लेकिन जिले में ऐसे दिव्यांगों की ड्यूटी लगाई गई जो खुद चलने में सक्षम नहीं है। अमरौधा ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक कृष्णपाल सिंह बैशाखी के सहारे चलते हैं। उन्हें पीठासीन की जिम्मेदारी की गई है। इसी तरह से एक पैर से दिव्यांग शिक्षक संजय अवस्थी को मतदान अधिकारी बनाया गया है। अमरौधा में उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक मोहम्मद जावेद दोनों पैर दिव्यांग हैं। उन्हें पीठासीन की जिम्मेदारी दी गई है।
सरवनखेड़ा ब्लाक के शिक्षामित्र सनोज कुमार एक हाथ से दिव्यांग हैं उनकी चुनाव में ड्यूटी लगाई है। ड्यूटी कटवाने के लिए वह अफसरों के चौखट के चक्कर काटते घूम रहे हैं। इस तरह के 50 से अधिक मामले हैं, इसमें दिव्यांगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर उन्हें मुसीबत में डाल दिया गया है। वहीं 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाई गई है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री राहत अली ने बताया कि ड्यूटी निर्धारण में हुई लापरवाही से शिक्षकों को परेशान होना पड़ रहा है। दिव्यांग शिक्षक, गर्भवती महिला कर्मचारियों व अन्य वाजिब कारण बताने वाले शिक्षक व कर्मचारियों के ड्यूटी कटवाने के प्रार्थना पत्र पर विचार करने के लिए संगठन की ओर से डीएम को पत्र दिया गया है। कहा कि ड्यूटी निर्धारण में लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।