कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉ. शाहीन फार्माकोलॉजी विभाग की एचओडी थी। इसके तहत दवाओं और शरीर के बीच की परस्पर क्रिया का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। वह सामान्य महिला फैकल्टी की तरह काम करती थी। छुट्टियां कम लेती थी और बच्चा लेकर अस्पताल आती थी। उसने मेडिकल कॉलेज परिसर में ही एल ब्लॉक में घर लिया था। सहयोगी पूछते तो कहती कि घर में कोई नहीं है ऐसे में बच्चे को अकेले कैसे छोड़ते।
उसकी महिला साथियों से अच्छी बनती थी। तलाक की बात भी सभी को नहीं पता थी। दिसंबर 2013 में डॉ. शाहीन अपनी सहयोगी डॉक्टर को एचओडी का कार्यभार सौंपकर गई थी। कहा था कि चार जनवरी 2014 को लौट आएगी। चार जनवरी को न आने पर साथियों ने फोन करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। इस तरह साल निकल गया। आधिकारिक तौर पर पत्राचार किया जाता रहा लेकिन जवाब नहीं मिला। प्राचार्य ने सन 2016 में दो कर्मचारियों को पंजीकृत पते पर पत्र लेकर भेजा। वहां कर्मचारियों के पहुंचने पर पता चला कि पता गलत है। इसके बाद 2021 में उसकी बर्खास्तगी की गई। अब दिल्ली बम धमाके के मामले में नाम आने के बाद चर्चा में आ गई।
पति डाॅ. जफर हयात से लिया था खुला
डॉ. शाहीन ने अपने पति से खुला लिया था। यह खुला लखनऊ के नदवा में लिया गया था। इसके लिए उनके पति डॉ. जफर हयात को भी कई बार जाना पड़ा था। डॉ. जफर ने बताया कि खुला मुस्लिम महिलाओं को पति से अलग होने के लिए मिला अधिकार है। उसने खुला लिया तो वह अपने घर वालों के साथ वहां गई थी। मुझे जब बुलाया गया तो मैं वहां गया था।