जुड़वां बेटियों के साथ डॉ. कोमल
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जो जुड़वां नवजात बेटियां किसी के लिए भार थीं, वे डॉ. कोमल यादव के जीवन का मकसद बन गईं। इन बेटियों के लिए डॉ. कोमल ने पति से भी एक ही वर्ष में दूरी बना ली। अब बेटियों को बेहतर शिक्षा और संस्कार देना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
डॉ. कोमल के इस संकल्प में उनकी मां भी सहयोग दे रही हैं। इन दिनों चंडीगढ़ में नौकरी कर रहीं डॉ. कोमल की बेटियों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो खासी वाहवाही लूट रही है। डॉ. कोमल मूलरूप से बुलंदशहर की रहने वाली हैं।
वर्ष 2014 में एमएस (सर्जन) की पढ़ाई महाराष्ट्र से पूरी करने के बाद उन्होंने फर्रुखाबाद में मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर ली। साथ ही वह आवास विकास कालोनी स्थित नर्सिंगहोम में भी सेवाएं देने लगी थीं। डॉ. कोमल ने 18 अक्तूबर 2015 को नर्सिंगहोम में भर्ती महिला का प्रसव कराया।
महिला ने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। प्रसूता के पति की छह माह पूर्व मौत हो चुकी थी और उसके दो बेटियां पहले से थीं। आर्थिक तंगी के चलते महिला अपनी नवजात बेटियों को नर्सिंगहोम में छोड़कर चुपचाप चली गई। उन दोनों नवजात बेटियों को डॉ. कोमल यादव ने गोद ले लिया।