चित्रकूट के मानिकपुर मारकुंडी वन क्षेत्र से सटे मुंबई हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेन की चपेट में आने से दर्जन भर से ज्यादा गिद्धों की मौत हो गई। पेट्रोलमैनों की सूचना पर भी कई घंटे तक कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। शुक्रवार शाम को वन विभाग चित्रकूट के कर्मचारी पहुंचे और गिद्धों के कटने की पुष्टि की।
रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के कर्मचारियों ने गिद्धों के शवों को सेंचुरी कार्यालय में रखा है। शनिवार को इनका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के रेंजर त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि रेलमार्ग पर किसी के शव को गिद्ध उसे खा रहे होंगे। इसी बीच तेज रफ्तार से कोई ट्रेन गुजरी होगी, तो वह सब इसकी चपेट में आ गए। कुछ ने उड़कर हटने का भी प्रयास किया, इससे उनके शव तितर-बितर पडे़ हैं।
वन जीव संरक्षण में आने वाले गिद्धों की मौत जिले के रानीपुर वन्य जीव विहार के मारकुंडी वन परिक्षेत्र में हो रही हैै। रेल लाइन किनारे आधा दर्जन शव गिद्धों के पाए गए। इसको लेकर समाजसेवियों ने चिंता जताई है। कहा कि विलुप्त पक्षी अपने की सुरक्षा के सही इंतजाम नहीं किए गए तो गिद्ध विलुप्त हो जाते हैं।
मारकुंडी वन क्षेत्र में मानिकपुर सतना रेलवे लाइन बनी है। इसमें सैकड़ों ट्रेनों का आवागमन रहता है, जंगल के आस-पास घूमने वाले गिद्ध अक्सर दर्जनों की संख्या में रेल लाइन में बैठ जाते हैं। इससे उनकी मौत हो जाती है।
पर्यावरणविद् कुंज मिश्रा का कहना है, पर्यावरण को बनाए रखने के लिए गिद्ध की भूमिका बहुत अच्छी रहती है। इस पक्षी को वन विभाग ने विलुप्त हो रहे पक्षी की श्रेणी में रखा है। वहीं, रानीपुर वन्य विभाग के अधिकारी त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि गिद्ध को संरक्षण देने का कार्य वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। रेल लाइन के आसपास निगरानी रखने के लिए भी वन विभाग की टीम लगी रहती है।