घरेलू हिंसा के आरोपी पति को 10 लाख नहीं बल्कि 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करना होगा। पत्नी की अपील खारिज करते हुए सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से गरीब और लाचार पति को बड़ी राहत मिली है।
श्यामनगर निवासी मीनाक्षी दुबे का विवाह 15 फरवरी 2009 को गंगापुर कालोनी निवासी आदेश दुबे से हुआ था। मई 2012 में मीनाक्षी ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करा दिया। आरोप लगाया कि दहेज में 50 हजार रुपये न लाने पर मार्च 2012 में होली के मौके पर उसे घर से निकाल दिया।
मुकदमे में फैसला सुनाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश मिलिंद कुमार सिंह ने मीनाक्षी के भविष्य के लिए एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में 10 लाख रुपये या प्रतिमाह आठ हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दे दिया। फैसले के खिलाफ पति ने रिवीजन याचिका दाखिल की।
इस पर अपर जिला जज पुनीत कुमार गुप्ता ने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दोबारा सुनवाई के आदेश दिए। एसीएमएम प्रथम मनोज कुमार द्वितीय ने मीनाक्षी को एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में केवल 20 हजार रुपये और स्त्रीधन लौटाने के आदेश 25 सितंबर 2019 को दिए।