कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग, नाक, कान गला रोग विभाग में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं। इनमें से प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों को ऑपरेशान की सलाह दी जा रही है लेकिन सर्जरी न कर उन्हें दवा देकर इंतजार कराया जा रहा है। ऑपरेशन के लिए मरीज भटक रहे हैं। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए महीनों से लोग दवा खाकर इंतजार कर रहे हैं। माइक्रोस्कोप व अन्य उपकरण न होने के कारण ऑपरेशन बंद है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जय वर्धन ने बताया कि नेत्र रोगियों के ऑपरेशन करने के लिए कॉलेज में ओटी का निर्माण हो चुका है। सर्जरी टेबल सहित कई उपकरण आ चुके हैं। माइक्रोस्कोप, फेको मशीन व सर्जिकल उपकरण न होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। गंभीर मरीजों को हैलट कानपुर रेफर किया जा रहा है। उपकरणों के लिए पत्राचार किया गया है। वहीं नाक, कान, गला रोग की ओपीडी में प्रत्येक कार्यदिवस पर औसतन 100 मरीज उपचार के लिए आते हैं। इनमें से 10 से 15 रोगी ऐसे होते हैं, जो ऑपरेशन के लिए आते हैं। इनके उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में ईएनटी सर्जन डॉ. अनुज शुक्ला तैनात है। ओटी में सीमित उपकरण होने के चलते महज सामान्य ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं। ऑपरेशन में जटिलता होने पर मरीजों को हैलट रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।