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IIT KANPUR के वैज्ञानिक का खुलासा: बायोमास का अंधाधुंध उपयोग दिल्ली में बढ़ा रहा प्रदूषण, जलाया जा रहा कोयला

Tue, 14 Mar 2023 03:34 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

प्रो. सच्चिदानंद ने बताया कि देश में 18 फीसदी लोगों की अकाल मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण है। बॉयोमास के दोहन से दुनिया की पांच फीसदी जनसंख्या व क्षेत्रीय जलवायु प्रभावित हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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सिंधु-गंगा नदी की तलहटी में बने मकानों में बायोमास (कोयला, लकड़ी आदि) का अंधाधुंध उपयोग लोग कर रहे हैं। इससे ही ठंड में दिल्ली में रात का प्रदूषण बढ़ जाता है और धुंध रहती है। यह खुलासा आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने अपने शोध में किया है। इस शोध को नेचर जियो साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

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दिल्ली में ठंड के दौरान रात को धुंध छाई रहती है। धुंध का कारण खोजने के लिए प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी और उनकी टीम ने शोध शुरू किया था। प्रो. त्रिपाठी की अगुवाई में हुए इस शोध में दो विदेशी संस्थाएं भी शामिल हैं। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), स्विट्जरलैंड का पॉल शेरर इंस्टीट्यूट (पीएसआई) और फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसमें सहयोग किया है।

प्रो. सच्चिदानंद ने बताया कि दिल्ली के आसपास के इलाकों में सिंधु-गंगा किनारे लाखों घर बने हैं। सर्दियों के मौसम में घरों को गर्म करने और खाना बनाने के लिए अनियंत्रित बायोमास जलाया जाता है। इससे अल्ट्राफाइन कण बनते हैं जो वातावरण में जाकर धुंध का रूप ले लेते हैं। उन्होंने ने बताया कि दुनिया के अन्य स्थानों की तुलना में यहां 100 नैनो मीटर से छोटे एयरोसोल तेजी से बढ़कर कुछ ही घंटों में धुंध का निर्माण करते हैं। इससे सर्दियों में पूरे समय धुंध ही छाई रहती है।
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18 फीसदी लोगों की मौत का कारण वायु प्रदूषण
प्रो. सच्चिदानंद ने बताया कि देश में 18 फीसदी लोगों की अकाल मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण है। बॉयोमास के दोहन से दुनिया की पांच फीसदी जनसंख्या व क्षेत्रीय जलवायु प्रभावित हो रही है। बायोमास के जलने से कार्बनिक वाष्प ने नैनो कणों के विकास में योगदान दिया। जिन कणों का आकार 100 नैनो मीटर से अधिक था, उसमें अमोनिया व क्लोराइड अधिक है।
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