कानपुर। डायबिटीज हो जाने पर चावल खाने के शौकीन रोगी अपना मन न मारे, काला नमक चावल भरपेट खाएं। काला नमक चावल का ग्लाइसीमिक इंडेक्स (जीआई) 49 से 52 फीसदी के बीच होता है जो सामान्य चावल का 70 फीसदी से अधिक होता है। यह इकलौता चावल है जिसमें विटामिन ए भी होती है। इसके अलावा यह चावल और भी पौष्टिक तत्वों से युक्त है।
शनिवार को यह बात शनिवार को आयोजित एलुमनी मीट में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के यूटिलिटी प्रेक्षागृह में वरिष्ठ धान विज्ञानी पद्मश्री डॉ. आरसी चौधरी ने बताई। काला नमक चावल की तुलना बासमती चावल से करते हुए उन्होंने बताया कि बासमती में छह और काला नमक में 11 प्रतिशत प्रोटीन होता है। बासमती की तुलना में इसमें तीन गुना अधिक आयरन होता है और चार गुना जिंक होता है। काला नमक का ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होने की वजह से यह डायबिटीज रोगियों के लिए यह एक तरह से शुगर फ्री चावल है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शासन को भी जानकारी दी है। ऐसे समय में जब डायबिटीज ने महामारी का रूप लिया है, सभी धानों में काला नमक सर्वश्रेष्ठ है। शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए इसमें अन्य तत्व भी हैं। उन्होंने काला नमक पर एक पुस्तक भी लिखी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि फिलीपींस में स्थित दुनिया के सबसे बड़े धान सीड बैंक इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट में धान के एक लाख 60 हजार बीज हैं। इनमें एक लाख सीड भारत के हैं, बाकी अन्य देशों के हैं। धान की एक बीज सौ साल तक जिंदा रहता है। इसकी आयु समाप्त होने के पहले इसे जर्मिनेट करा लिया जाता है। काला नमक धान का इतिहास तीन हजार साल पुराना है।