कानपुर शहर में मिठाई का कारोबार साल दर साल बढ़ता जा रहा है। हर साल 15 से 20 प्रतिशत की दर से मिठाई की खपत बढ़ रही है। इस होली पर करीब ढाई लाख किलो से ज्यादा की अलग-अलग प्रकार की गुझिया, मिठाइयां बिकने का अनुमान है। वहीं, शहर में प्रति वर्ष डायबिटीज और मोटापे का शिकार लोगों की संख्या भी आठ प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। ये वे रोगी हैं जो अस्पतालों और विशेषज्ञों की क्लीनिक में पंजीकृत हुए हैं।
शहर भर में पांच हजार से ज्यादा मिठाई की दुकानें हैं। महंगी मिठाई और गुझिया की मांग बढ़ती जा रही है। बेकरी कारोबारी भी मिठाई और गुझिया बनाने लगे हैं। कारोबारियों ने बताया कि खोया की मिठाई के बजाय लोग मेवा की बनी मिठाई की ओर रुख कर चुके हैं। बाजार में केसर चंद्रकला, फाल्गुनी केसर, मेवा पोटली, टर्किश, केसरिया, चॉकलेट, काजू, पिस्ता फाल्गुनी गुझिया आई है। इसकी कीमत 600 रुपये लेकर 1600 रुपये किलो तक है। मांग बढ़ने से हर साल इन मिठाइयों के दाम 30-50 रुपये प्रति किलो बढ़ जाते हैं।