इस बार देवोत्थानी एकादशी 19 नवंबर को पड़ रही है। भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागेंगे। इस दिन अबूझ मुहूर्त है। प्रभु के स्वागत को कानपुर शहर के गंगा घाटों पर पांच लाख से ज्यादा दीप जलाए जाएंगे। मां गंगा की आरती की जाएगी। भजनों के माध्यम से भक्त मां गंगा की स्तुति करेंगे।
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एकादशी पर कानपुर के सरसैया घाट, परमट, गोला, मैस्कर घाट, गंगा बैराज, ब्रह्मावर्त बिठूर घाट समेत विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु दीपदान करेंगे। डीएम विजय विश्वास पंत ने 60 जिला स्तरीय अफसरों की तैनाती की है जो घाटों पर दोपहर से ही मौजूद रहेंगे।
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डीएम ने धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम व्यवस्थित ढंग से किए जाएं। साथ ही घाटों की सफाई और बेहतर करने के आदेश दिए। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा से कहा कि वे पेयजल तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। सरसैया घाट पर चार नावों को जोड़कर एक बड़ा तख्त उस पार रखा जाए ताकि गंगा के बीच में ही भजन गायक भजन गा सकें।
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शुरू होंगे मांगलिक कार्य
देवोत्थानी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त है। मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत भी देवोत्थानी एकादशी से हो जाएगी। आचार्य आदित्य पांडेय और आचार्य दीपक पांडेय ने बताया कि भगवान विष्णु 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन हो गए थे। तभी से मांगलिक कार्य रुक गए थे।
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देवोत्थानी एकादशी से नारायण पुन: बैकुंठ में पहुंच जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। हालांकि अभी तारा अस्त है। इस कारण वैवाहिक कार्यक्रम अभी नहीं होंगे। अन्य मांगलिक कार्य होंगे।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं सिद्ध योग में एकादशी की शाम से सभी शुभ योग शुरू हो जाएंगे। देवोत्थानी एकादशी को भगवान विष्णु के लिए एपन से सीढ़ी बनाई जाती है जो कि घर से मंदिर तक जाती है। पूजन में पीली खीर, कढ़ी, एवं चावल का प्रसाद बनाया जाएगा।