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खाड़ी देशों में भी हरे कृष्णा, हरे कृष्णा... मंत्र की है धूम, बढ़ रहा इस्कॉन ग्रुप

Fri, 12 Oct 2018 10:01 AM IST
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

- दुबई, अरब अमीरात, बहरीन, ईरान आदि देशों में बने इस्कॉन ग्रुप
- पाकिस्तान में एक और बांग्लादेश में हैं 20 इस्कॉन मंदिर
- इस्कॉन जीबीसी के सदस्य भक्ति चैतन्य स्वामी (रिचर्ड) ने कहा, युवाओं में दिलचस्पी
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चैतन्य स्वामी, पंच रतन दास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खाड़ी देशों में भी हरे कृष्णा, हरे कृष्णा... मंत्र की धूम है। खासतौर पर इन देशों की युवा पीढ़ी मानसिक शांति के लिए इस ओर आकर्षित हो रही है। इन देशों में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्सेसनेस (इस्कॉन) के ग्रुप लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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दुबई, अरब अमीरात, बहरीन, ईरान, शारजाह आदि खाड़ी देशों में ये इस्कॉन ग्रुप लगातार कृष्ण चेतना का प्रचार भी कर रहे हैं। इस्कॉन की गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) के सदस्य भक्ति चैतन्य स्वामी (रिचर्ड) ने बताया कि पाकिस्तान में एक और बांग्लादेश में भी 20 इस्कॉन मंदिर हैं। उन्होंने बताया कि मानसिक शांति, अपने सवालों के जवाब पाने के लिए यहां की युवा पीढ़ी इस्कॉन ग्रुप से जुड़ रही है। 
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इस्कॉन मंदिर कानपुर की फाइल फोटो
कानपुर में मैनावती मार्ग स्थित शहर के इस्कॉन मंदिर में अंतरराष्ट्रीय साधु सम्मेलन हो रहा है। इस मौके पर साउथ अफ्रीका के डरबन से आए जीबीसी सदस्य भक्ति चैतन्य स्वामी ने अमर उजाला को विशेष बातचीत में बताया कि दुबई में इस वक्त 50 इस्कॉन ग्रुप काम कर रहे हैं। वहां शुक्रवार के दिन आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन होता है। इसमें सात-आठ सौ लोग भाग लेते हैं। इनमें युवाओं की अच्छी खासी संख्या होती है। इसके साथ ही शारजाह में पांच और इरान में अभी एक ग्रुप बना है। बहुत जल्दी इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

अरब अमीरात और मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों में भी ग्रुप बन गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रुप के बढ़ने के बाद इस्कॉन मंदिर भी बनाए जाएंगे। चैतन्य स्वामी ने बताया कि जिन देशों में अशांति है, वहां के युवाओं में बेचैनी अधिक है। आज के युवा पहले की तरह नहीं है, वे अपने हर सवाल का वैज्ञानिक रूप से जवाब चाहते हैं। वे गंभीर विकल्प की तलाश में हैं और आध्यात्म से बेहतर कोई रास्ता नहीं है। कृष्णा कॉन्सेसनेस (चेतना) में उन्हें जवाब मिलता है।
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