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Kanpur News: जानकारी के बाद भी खानचंद्रपुर के लोग बेबसी में इस्तेमाल कर रहे हैं दूषित पानी

Mon, 24 Nov 2025 01:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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रनियां। औद्योगिक क्षेत्र से सटे खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर दो दशक पहले छह कंपनियों की ओर से डंप किए गए क्रोमियम ने लोगों की जान सांसत में डाल दी है। भूजल दूषित हो जाने से लोगों के शरीर में मानक से अधिक क्रोमियम पहुंच गया है। इसकाे लेकर युवा काफी चिंतित हैं। जिम्मेदारों की ओर से किए गए प्रबंध काफी न होने से खानचंद्रपुर के लोगों को जानकारी होने के बावजूद भी दूषित पानी का प्रयोग करना पड़ रहा है।
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खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर छह फैक्टरियों की ओर से 20 साल पहले करीब 95, 000 मीट्रिक टन क्रोमियम डंप कर दिया गया था। इसके चारों ओर न तो सुरक्षा जाली लगाई गई थी और न ही इससे होने वाले नुकसान से बचाव को लेकर ध्यान दिया गया था। बारिश के पानी के साथ जमीन के अंदर पहुंचे क्रोमियम ने भूजल दूषित कर दिया। लोगों की सेहत पर असर पड़ना शुरू हो जाने पर एनजीटी ने संज्ञान लेकर लोगों को पीने के पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। पहले वैकल्पिक तौर पर अकबरपुर व पुखरायां से दो-दो पानी के टैंकरों से लोगों को पीने के पानी की व्यवस्था की गई।
इसके बाद चौहानपुरवा में पानी की टंकी का दूसरे स्थान पर बोरिंग की गई। स्वच्छ पानी मिलने पर करीब 450 कनेक्शन देकर लोगों को साफ पानी मुहैया करवाया गया। पाल पुरवा निवासी रवि पाल, चौहान पुरवा निवासी जय सिंह आदि ने बताया कि बिजली या अन्य समस्या होने पर कुछ लोगों के घर में साफ पानी देने वाले निजी हैंडपंप का इस्तेमाल करना पड़ता है। कई बार जानकारी होने के बाद भी दूषित पानी से ही काम चलाना पड़ रहा है। गांव के आर्थिक रूप से मजबूत करीब 20 घर बीमारी से बचने के लिए आरओ का पानी खरीद रहे हैं। यदि गांव में आरओ प्लांट लग जाए तो ग्रामीणों को सहूलियत मिलेगी।
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एनजीटी की सख्ती के बाद सरकारी हैंडपंपों से हटवाए गए थे हत्थे
क्रोमियम का असर लोगों की सेहत पर पड़ना शुरू होने पर एनजीटी की सख्ती के बाद वर्ष 2019 में 40 लोगों के रक्त का नमूना जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था। नवंबर 2023 में आई रिपोर्ट में 20 लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम मिलने पर एनजीटी ने सख्ती बढ़ा दी थी। इस पर जल निगम की ओर से सितंबर 2024 में खानचंद्रपुर से 29 दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों से हत्थे खोल लिए गए थे। इसके बाद भी गांव में कई हैंडपंप लगे हैं। जिन पर जिम्मेदारों की ओर से दूषित पानी होने की वजह से लाल निशान लगाए गए थे। इन शेष हैंडपंपों का प्रयोग आज भी ग्रामीण कर रहे हैं।
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शादी में आएगी परेशानी, रक्त नमूना देने में करते आनाकानी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों में क्रोमियम का खतरा जानने के लिए अभी तक 418 लोगों की रक्त की जांच करवाई जा चुकी है। इसमें 259 लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम मिल चुका है। एनजीटी के आदेश पर 25 नवंबर से 30 नवंबर तक 150 नये लोगों के रक्त व यूरिन के नमूने लेकर जांच के लिए लखनऊ भेजने हैं। इसके लिए 12 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो ग्रामीण रक्त का नमूना देने में आनाकानी करते हैं। कई बार तो युवा जांच में क्रोमियम बढ़ा निकल आने पर शादी होने में परेशानी होने की बात कहकर नमूना देने से मुकर जाते हैं। कई बार टीम से अभद्रता पर भी उतारू हो जाते हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग को नमूने लेने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। मंगलवार से शुरू होने वाले अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगर पंचायत, ग्राम पंचायत व पुलिस से लोगों को जागरूक करने में सहयोग करने के लिए पत्र लिखा गया है।
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मवेशी आज भी पीते दूषित पानी
पाल पुरवा निवासी अरुण पाल, यादव पुरवा निवासी पिंटू यादव ने बताया कि एतियात बरतने के बावजूद भी लोगों को दूषित पानी का प्रयोग रोजमर्रा के कार्यों में करना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या मवेशियों को स्वच्छ पानी पिलाने की है। मवेशियों को दूषित पानी पिलाने से उनसे मिलने वाले दूध व अन्य पदार्थों से अप्रत्यक्ष तौर पर क्रोमियम लोगों के शरीर में पहुंच रहा है। मवेशियों को स्वच्छ पानी देने की व्यवस्था की जाए।
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वर्जन.....
स्वास्थ्य विभाग की ओर से खानचंद्रपुर व इससे सटे गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। डंपिंग स्थल से दो कंपनियों की ओर से डंप क्रोमियम की उठान की जा चुकी है। डंपिंग स्थल पर सिर्फ मिट्टी में मिला हुआ क्रोमियम बचा है। इसकी उठान करवाने के लिए सर्वे करने को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखा जा चुका है। वहीं खानचंद्रपुर में आरओ प्लांट लगवाने को लेकर जल निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया था। उनकी ओर से गांव में स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाए जाने की जानकारी दी गई है।
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- मनोज चौरसिया, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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