राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के पूर्व जिला समन्वयक डॉ. एसके निगम ने बताया कि इन रोगियों की जांच मानसिक रोग विशेषज्ञ करते हैं। इसके साथ ही इनकी पैथोलॉजिकल जांचें भी कराई जाती हैं। डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, लिवर, गुर्दे के पुराने रोगियों को कोरोना के बाद अधिक दिक्कत हो गई है। आशा कार्यकर्ता एएनएम की जिम्मेदारी होती है कि वे रोगियों की निगरानी करें और उन्हें जांच के लिए लाएं। जांच के बाद रोगियों को एक महीने की दवा दी जाती है।
केस-एक: चौबेपुर के रहने वाले ब्रज किशोर (20) को अचानक बहुत तेज गुस्सा आता है। कभी गुमसुम हो जाता है। सीएचसी में जांच कराई। इसके बाद रोगी ने हैलट में मनोरोग विभाग की ओपीडी जांच कराई। वह कोविड से संक्रमित हुआ था। इलाज होम आइसोलेशन में किया। कहता है कि अचानक गुस्सा आता है। काम, छोड़ दिया है। कभी बहुत तेज घबराहट होती है और नींद नहीं आती।
केस-दो: बिधनू की रचना (19) ने कल्याणपुर के मनोरोग शिविर में दिखाया। इसके बाद हैलट ओपीडी में भी जांच कराई। उसका मां फूलदेवी ने बताया कि उसे घबराहट होती है। जान देने की बात करती है। बहुत अधिक बात करती है, टोकने पर लड़ती है। पढ़ाई छोड़ दी है। खाना कम खाती है। डॉक्टर ने उसे अवसाद बताया है।
ये बढ़े
कार्टिसोल, एडरीनलीन
मनोरोग विभाग की ओपीडी में भी बढ़े रोगी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में ग्रामीण इलाकों से आने वाले रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इनमें युवाओं की संख्या अधिक है। रोगी अवसाद, अनिद्रा, उलझन, मेनिया, बाईपोलर आदि दिक्कतें लेकर आ रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि 20 से 25 फीसदी रोगियों की संख्या बढ़ी है।
ऐसे करें बचाव
- खुद को मजबूत बनाएं
- समस्या का डटकर मुकाबला करें
- नकारात्मक बात करने वालों से दूर रहें
- सोशल मीडिया पर नकारात्मक चीजें न देखें
- परिवार में बैठकर सकारात्मक बातें करें
- घर के सदस्य एक-दूसरे की ताकत बनें
(संदीप कुमार सिंह, साइको काउंसलर, उर्सला)