इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कानपुर चैप्टर की महिला विंग की अध्यक्ष वंदना मिश्रा का शुक्रवार को जाम में फंसकर निधन हो गया था। राष्ट्रपति के आगमन के दौरान गोविंदपुरी पुल पर ट्रैफिक रोका गया था, जहां करीब 45 मिनट जांम में फंसी रहीं थीं।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कानपुर चैप्टर की महिला विंग की अध्यक्ष वंदना मिश्रा के परिवार वालों को कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, सासंद सत्यदेव पचौरी एवं गोविंद नगर विधानसभा विधायक सुरेंद्र मैथानी सांत्वना देने उनके निवास किदवई नगर के ब्लाक पहुंचे। मंत्री महाना, सांसद पचौरी व विधायक मैथानी ने इस घटना को लेकर क्षमा मांगी।
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पति शरद मिश्रा से मिलकर हालचाल पूंछा और हिम्मत से काम लेने को कहा। शरद मिश्रा अपनी पत्नी वंदना मिश्रा की संघर्ष की बात बताते समय वे रोने लगे, तो पानी पिलाकर शांत कराया। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री ज्ञानेश मिश्रा ने शरद मिश्रा से एक बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से फोन पर बात कराने की मांग की।
जिस पर सांसद सत्यदेव पचौरी ने कहा कि प्रोटोकॉल नहीं है, जिससे अभी फोन पर बात कराना संभव नहीं है। आप लिखित में हमे दीजिए हम दिल्ली जाकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकत करेंगे, और आप की बात उन तक पहुंचाएंगे। वहीं, घनश्यामदास चौराहे से कर्नल हुसैन स्कूल तक की सडक को वंदना मिश्रा मार्ग करने की मांग की।
जाम में फंसकर महिला उद्यमी की मौत
- फोटो : अमर उजाला
सांसद ने कहा कि वंदना मिश्रा भारतीय जनता पार्टी की भी कार्यकर्ता और उद्यमी महिला थी। इस दौरान शरद मिश्रा के साथ उनके भाई सचिन मिश्रा, बेटे वरद व उत्सव साथ में रहे। इस मौके पर पार्षद प्रमोद जायसवाल, डीसीपी साउथ रवीना त्यागी, विजय गुप्ता, विनायक पोद्दार, प्रखर श्रीवास्तव, ज्ञानू अवस्थी, दीपक सिंह आदि रहे।
बता दें कि इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कानपुर चैप्टर की महिला विंग की अध्यक्ष वंदना मिश्रा का शुक्रवार को जाम में फंसकर निधन हो गया था। राष्ट्रपति के आगमन के दौरान गोविंदपुरी पुल पर ट्रैफिक रोका गया था, जहां करीब 45 मिनट जांम में फंसी रही। जाम खुलते ही उन्हें अस्पताल ले जाया जा सका। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
वंदना की संघर्ष की बात बताते समय शरद रो पड़े
वंदना मिश्रा के पति शरद मिश्रा ने बताया कि 15 साल पहले वंदना ने बुकनू बनाने का कार्य शुरु किया था। फिर सब्जी मसाले भी कार्य किया। जिससे संघर्षों से उद्योग बढाकर अपना स्थान बनाया। उनकी कमी हमेशा रहेगी, यह बात बताते समय शरद मिश्रा रोने लगे। जिसके बाद पानी पिलाकर उन्हें शांत किया गया।