घर आने के बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे तभी मां राम दुलारी ने विमलेश के दिल की धड़कन आने की बात कहकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। तभी से माता-पिता उसके शव को घर के एक कमरे में रखकर देखभाल कर रहे थे। घर पर विमलेश की पत्नी मिताली के अलावा विमलेश के भाइयों सुनील, दिनेश के परिवार भी रह रहे हैं।
आजमगढ़ पुलिस के अधिकारी के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पहुंची परिजनों ने शव ले जाने को मना कर दिया। परिजन इस बात पर डटे रहे है कि अभी भी जीवित है। इस पर मेडिकल टीम ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के संबंध हैलट अस्पताल भेजा गया। वहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया है। बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
एक सप्ताह पहले पत्नी की शिकायत पर शुक्रवार दोपहर स्वास्थ्य विभाग की ओर से डिप्टी सीएमओ डॉ. ओपी गौतम की टीम और एसीपी कल्याणपुर दिनेश कुमार शुक्ला फोर्स संग घर पहुंचे। टीम ने विमलेश का परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया।
टीम जब शव को कब्जे में लेने लगी तो माता-पिता ने विमलेश के जिंदा होने की बात कह हंगामा शुरू कर दिया। दावा कर रहे थे कि विमलेश कोमा में हैं। इसके बाद पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए ले गई। हालांकि, डेढ़ साल तक विमलेश के साथ परिवार के लोग कैसे रहे? ये बात किसी को समझ में नहीं आ रही है।
ऐसे खुला मामला
एक सप्ताह पहले विमलेश की पत्नी मिताली ने अहमदाबाद स्थित इनकम टैक्स कार्यालय में पति के मरने की सूचना दी थी। विभाग को किए गए फोन पर उन्होंने कहा था कि उनके पति की मौत हो चुकी है, फिर भी माता-पिता उनका शव रखे हुए हैं। इस पर विभाग की ओर से कानपुर के सीएमओ और जिलाधिकारी को एक पत्र लिख मामले की जांच करने को कहा गया। तभी शुक्रवार को एसीएमओ की तीन सदस्यीय टीम और पुलिस मामले की जांच करने पहुंची थी।
सीएमओ की मांग पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पुलिस फोर्स मौके पर भेजा गया था। शव को पुलिस की मौजूदगी में कब्जे में लेकर हैलट लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका परीक्षण किया। -बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर