चकेरी के चर्चित सनी गिल हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीएवी कालेज के पूर्व महामंत्री अरविंद राज त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष बंटी सेंगर को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। कोर्ट ने सनी की हत्या को इरादतन हत्या नहीं माना।
तीसरे हत्यारोपी पूर्व अध्यक्ष आशीष साहू को कोर्ट ने दफा 302 के बजाय 304 के तहत दस साल की कड़ी सजा और पचास हजार जुर्माने की सजा सुनाई। इससे पहले सीतापुर कोर्ट ने इन तीनों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास दिया था।
तीनों आरोपी अपील पर हाईकोर्ट चले गए थे जहां से दो को बरी कर दिया गया। बंटी सेंगर इस समय समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हाईकोर्ट में 28 जनवरी 2016 को इस मामले की पहली बहस हुई और उसी दिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
शुक्रवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अरविंद राज त्रिपाठी और बंटी सेंगर को बरी करते हुए आशीष साहू को सजा सुनाई। बंटी सेंगर ने बताया कि कोर्ट में अभियोजन पक्ष सनी की हत्या करने की उनकी और छोटू त्रिपाठी की मंशा साबित नहीं कर पाया।
बता दें कि 14 सितंबर 2008 को चकेरी थाना क्षेत्र निवासी रणवीर सिंह गिल के पुत्र सनी गिल की चकेरी में छात्र सम्मेलन के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सनी के पिता ने डीएवी के छात्र नेता आशीष साहू, अरविंद राज त्रिपाठी, बंटी सेंगर और एक अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करवाया था।
जांच के दौरान अजीत राजपूत नामक युवक का नाम भी इस मामले में बढ़ा। आशीष साहू मौके से गिरफ्तार हुआ था और आज तक जेल में है। विवेचना के दौरान छोटू और बंटी का नाम पुलिस ने मुकदमे से निकाल दिया था इसलिए कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में भी छोटू और बंटी के नाम का जिक्र नहीं था।
वादी ने चार्जशीट को चुनौती देते हुए छोटू और बंटी के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मांग की जिसको कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। ट्रायल केदौरान ही वादी की मांग पर मुकदमा सीतापुर कोर्ट ट्रांसफर हो गया जिस पर 21 जुलाई 2014 को कोर्ट ने अजीत, बंटी सेंगर, अरविंद राज त्रिपाठी और आशीष साहू को आजीवन कारावास की सजा सुना दी थी।
दिसंबर 2015 में आशीष साहू ने भी हाईकोर्ट से बेल मांगी थी जिसको रिजेक्ट कर दिया गया। अजीत राजपूत का नाम विवेचना केदौरान प्रकाश में आया था, जिसे सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया था, जिसे वादी ने कोर्ट में चुनौती नहीं दी।