दिनेश की सलेथू गांव में पैतृक दो बीघा खेतिहर भूमि थी। यह जमीन गंगा एक्सप्रेसवे में चली गई। दिनेश ने 25 मई को भूमि की रजिस्ट्री कर दी थी। इसी बीच उन्होंने बड़ी बेटी आरती की 17 जून को कानपुर में शादी तय कर दी। उम्मीद थी शादी से पहले मुआवजा मिल जाएगा। कागजी जांच पड़ताल में समय लगने के कारण 15 जून तक दिनेश के खाते में पैसा नहीं पहुंचा।
पैसा न मिलने से दिनेश परेशान हो गए। पिता की परेशानी देख आरती ने 15 जून की सुबह दस बजे सिटी मजिस्ट्रेट चंदन कुमार पटेल को व्हाट्सएप मैसेज कर अपनी व्यथा बताई। लिखा कि मुआवजा न मिलने से मेहमानों का सत्कार, आभूषण व अन्य सामान की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। शादी टलने की नौबत आ गई है।
उसके पिता की इज्जत दांव पर है। इसकी रक्षा करना उनके हाथ में है। सिटी मजिस्ट्रेट ने तुरंत सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कराईं और उसी दिन दोपहर तीन बजे पिता के खाते में 20 लाख ट्रांसफर करा दिए। इसके बाद आरती ने फिर मैसेज कर आया। इसमें उसने पैसा पहुंचने की जानकारी देकर शादी बचाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को धन्यवाद ज्ञापित किया।