ट्रैफिक जाम में बेवजह हॉर्न बजाने से होने वाला ध्वनि प्रदूषण कान की नसों को खराब कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 14 फीसदी आबादी ध्वनि प्रदूषण की चपेट में है। इससे कान में दर्द, सनसनाहट, भारीपन व्यक्ति की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रही है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर कानपुर में सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी, ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कनौजिया ने मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों को बताया कि कानों की सेहत के लिए 26 डेसिबिल तक ध्वनि दुरुस्त है।
उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को माताएं गोद में लिटाकर दूध न पिलाएं, कानों में संक्रमण हो सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि लोग कानों की श्रवण शक्ति के संबंध में तब ध्यान देते हैं, जब बहरापन हो जाता है। श्रवण शक्ति की जांच कराते रहना चाहिए।