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ध्वनि प्रदूषण से खराब हो रही कान की नसें, इन बातों का रखें ख्याल

Sun, 07 Apr 2019 11:48 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फाइल फोटो
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ट्रैफिक जाम में बेवजह हॉर्न बजाने से होने वाला ध्वनि प्रदूषण कान की नसों को खराब कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 14 फीसदी आबादी ध्वनि प्रदूषण की चपेट में है। इससे कान में दर्द, सनसनाहट, भारीपन व्यक्ति की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रही है।
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विश्व स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर कानपुर में सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी, ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कनौजिया ने मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों को बताया कि कानों की सेहत के लिए 26 डेसिबिल तक ध्वनि दुरुस्त है।

उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को माताएं गोद में लिटाकर दूध न पिलाएं, कानों में संक्रमण हो सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि लोग कानों की श्रवण शक्ति के संबंध में तब ध्यान देते हैं, जब बहरापन हो जाता है। श्रवण शक्ति की जांच कराते रहना चाहिए।
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10 फीसदी बच्चों को कान की दिक्कत होती है। लोग बच्चों के कान बहने पर अधिक ध्यान नहीं देते और बाद में नसें खराब हो जाती हैं। उन्होंने मीजिल्स, रूबैला के टीके लगवाने की सलाह देकर बताया कि प्रिमैच्योर बच्चों के कान जरूर चेक करवाएं।

शुरुआती पहले, तीसरे और छठवें महीने में बच्चों के कान की जांच करा लेनी चाहिए। यहां प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी पाठक, डॉ. देवर्थ लालचंदानी, डॉ. अरविंद कुमार मौजूद रहे।
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