साइबर फ्राॅड पर राेकथाम के लिए उठाए गए कदम
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
आईआईटी कानपुर में साइबर, फोरेंसिक सेल बनाने पर सहमति बन गई है। इसके जरिये साइबर फ्राड का खुलासा किया जाएगा। वीडियो और कैमरा फोटोग्राफ से अपराधियों को पहचानकर पुलिस को सूचना दी जाएगी। एक साल के प्रोजेक्ट पर करीब 12 लाख रुपये खर्च होंगे।
इस प्रोजेक्ट पर पुलिस (डीजीपी) और आईआईटी स्तर से सहमति बन गई है। अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता इसी महीने संभव है। आईआईटी में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सीनियर प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि सेल की मदद से कंप्यूटर बेस्ड क्राइम का खुलासा किया जाएगा। डाटा बैंक बनाकर रिकार्ड रखा जाएगा। अभी क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरा या फिर वीडियो कैमरा से अपराधियों की सटीक पहचान नहीं हो पाती है लेकिन सेल की मदद से यह संभव होगा। कितनी भी खराब फोटो या फुटेज को साफ करके अपराधी की सही तस्वीर सामने लाई जा सकेगी। यह यूपी का अपने तरह का अनोखा सेल होगा। इसके जरिये साइबर, फोरेंसिक एक्सपर्ट भी तैयार किए जाएंगे। इसके लिए ट्रेनिंग के विशेष इंतजाम किए गए हैं। बैंकिंग फ्राड की छानबीन भी साइबर, फोरेंसिक सेल की मदद से की जाएगी।