िपछले ८ साल से िनमार्णाधीन है। एेसी ही कुछ परियोजनाओं ने िजले का बंटाधार कर दिया।
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कानपुर। जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही से जिले की नाक कट गई है। स्वास्थ्य और बिजली विभाग की अधूरी परियोजनाओं ने जिले की साख पर बट्टा लगा दिया है। विकास कार्यों की ओवरऑल रैंकिंग में कानपुर नगर को डी-ग्रेड मिला है। प्रदेश के 75 जिलों में कानपुर 35वें स्थान पर है। यह रैंकिंग प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई है। 109 तरह के विकास कार्यों की समीक्षा शासन करता है। साल भर में जो काम पूरे होते हैं, उस पर 100 फीसदी मार्क्स दिए जाते हैं। फिसड्डी पर जीरो मिलते हैं। इसी मार्क्स को आधार बनाकर हर मंडल और जिले की रैंकिंग जारी की जाती है। यूपी में 17 मंडल हैं जिसमें कानपुर 13वें नंबर पर है।
स्वास्थ्य महकमा शेम-शेम
प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण, उसके हस्तांतरण में भी कानपुर नगर फिसड्डी साबित हुआ। कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन और जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की मानीटरिंग के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण की प्रगति जीरो है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण 14.29 फीसदी हो सका है। जिला अस्पताल और 50, 100 और 200 की मैटरनिटी विंग का निर्माण ठप है। 100 फीसदी के लक्ष्य में कानपुर नगर को जीरो मिले हैं।
बिजली विभाग ने डुबोया
नगर जिले के 1800 गांवों और उनके मजरों को राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना का लाभ दिया जाना था लेकिन अभी तक 300 गांवों में ही बिजली पहुंच सकी। कमिश्नरी से जारी आंकड़ों के मुताबिक गांवों में बिजली पहुंचाने की प्रगति 100 में से सिर्फ 15.90 फीसदी है। बिजली कनेक्शन का मामला और खराब है।
रोजगार में भी पिछड़े
कौशल विकास और युवाओें को रोजगार मुहैया कराने का काम भी धीमा पाया गया है। इसका लाभ 49 फीसदी युवाओं को नहीं मिल सका। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कंप्यूटराइजेशन, आम आदमी बीमा, लोहिया ग्रामीण आवास (आवासहीन को आवास मुहैया कराना), पेयजल, सीवरेज और ड्रेनेज की परियोजनाओं, राजीव आवास योजना, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन (आसरा योजना), बेघरों केे लिए आश्रय योजना, नक्शा और आधार कार्ड के डिजिटिलाइजेशन और स्वच्छ शौचालय निर्माण का काम भी पिछड़ा है।
देहात भी पिछड़ा
देहात में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण का 85 फीसदी काम नहीं हो सका। पिछले एक साल के दौरान 1.32 फीसदी गांवों में ही बिजली पहुंची है। कौशल विकास और युवाओं को रोजगार देने का मामला भी पिछड़ा है। सिर्फ 14% युवाओें को प्रशिक्षण दिया जा सका है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण भी नहीं कराया जा सका। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कंप्यूटराइजेशन का 49 फीसदी काम नहीं हुआ। स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ शौचालय का निर्माण कार्य अधूरा है।