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अवैध खनन का पाप और अभिशाप, दो खनिज मंत्री जेल में

Tue, 28 Mar 2017 02:21 PM IST
रशीद सिद्दीकी, अमर उजाला, कानपुर

सार

-अवैध खनन के साथ सिंडीकेट का भी खेल
-बसपा और सपा सरकारों में खूब पनपा अवैध खनन
-अब नई सत्ता में रसूख वालों की टिकीं निगाहें
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अवैध खनन
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विस्तार
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धरती की भाग्य रेखा कही जाने वाली नदियों और संतुलन बनाए रखने वाले पहाड़ों का सीना चीर कर अवैध खनन का पाप और अभिशाप शायद सिर चढ़कर बोलता है। प्रदेश की पूर्ववर्ती बसपा और सपा सरकारों में यह बेतहाशा हुआ। शायद इसी का नतीजा है कि इन दोनों सरकारों के खनिज मंत्री इन दिनों जेल में हैं। अब मौजूदा प्रदेश की नई सरकार में भी खनन और सिंडीकेट हथियाने के लिए पुराने और नए चेहरे जुगत में जुट गए हैं।
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यहा खनन का कारोबार बसपा सरकार में पनपा

बाबू सिंह कुशवाहा और गायत्री प्रजापति
बुंदेलखंड में खनन का वैध और अवैध कारोबार बसपा में पनपना शुरू हुआ। यह इतना परवान चढ़ा कि इसे हथियाने के लिए तमाम हस्तियां जुट गईं। रोजाना करोड़ों रुपये का काला धंधा शुरू हो गया। रॉयल्टी तो सरकार के खजाने में जाती रही, लेकिन उससे कई गुना ज्यादा काली कमाई सिंडीकेट के नाम पर हुई। सिंडीकेट की रकम खदान से लेकर सरकार में बैठे लोगों के बीच बंटती रही। बसपा की सत्ता जाने के बाद सपा सरकार बनी तो अवैध खनन और सिंडीकेट में कोई कमी नहीं आई। यह काला कारोबार सत्तारूढ़ दल के लोग ही हथियाए रहे। बसपा सरकार के खनिज मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और सपा सरकार के खनिज मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति इन दिनों जेल में हैं। अवैध खनन की सीबीआई जांच भी चल रही है।   

अवैध खनन के खिलाफ योगी के तेवर सख्त

योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
अब प्रदेश में भाजपा की सरकार ने कमान संभाल ही है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के तेवर फिलहाल अवैध खनन को लेकर सख्त दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में इन दिनों अवैध खनन और सिंडीकेट वसूली का काम थम गया है। उधर, खदानें और सिंडीकेट हथियाने के लिए सत्ता में रसूख रखने वाले लोगों ने हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि सपा और बसपा सरकारों में बालू और सिंडीकेट से जुड़े रहे कई नेता अबकी भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव जीतकर विधायक बन गए हैं। कई बालू कारोबारियों ने चुनाव के पूर्व पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था। अब वह फिर अपना पुराना धंधा हथियाने के लिए नई सरकार में गोटें बैठा रहे हैं।  

क्या है सिंडीकेट

डेमो
खनिज विभाग से नीलामी के जरिए खदानों के पट्टे लेकर खदान के निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक स्थल से बालू निकालना अवैध खनन कहलाता है। इसी तरह बालू खरीदने आए ट्रकों से प्रति ट्रक लगभग 10 से 15 हजार रुपये की अवैध वसूली को सिंडीकेट टैक्स कहते हैं। इसके पैसे का पूरी तरह बंटवारा वसूली ठेकेदार से लेकर सरकार में बैठे लोगों तक होता है। सिंडीकेट का काम मंत्री स्तर से मिलता है। सिंडीकेट का सारा काम मौखिक चलता है। गैरकानूनी होने से इसके कोई अभिलेख नहीं बनते।  

रॉयल्टी एमपी की, सिंडीकेट यूपी का

डेमो
इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक के बाद पिछले वर्ष से पूरे बुंदेलखंड में बालू खनन का काम बंद है। कुछ खदानों में चोरी-छिपे यह हो रहा है। अलबत्ता बुंदेलखंड की सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश में कोई रोक न होने से बालू खनन जोरशोर से चल रहा है। बांदा जनपद की सीमा से जुड़े पन्ना (एमपी) के चंदौरा गांव के पास केन नदी से खनन रात-दिन चल रहा है। यहां का पट्टा एमपी, यूपी और राजस्थान के लोग मिलजुलकर लिए हुए हैं। रॉयल्टी मध्य प्रदेश सरकार के खजाने में जा रही है, लेकिन सिंडीकेट के नाम पर करीब 15 हजार रुपये प्रति ट्रक अलग वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त यूपी की सड़कों से गुजरने वाले ट्रकों को 5 से 7 हजार रुपये प्रति ट्रक और देना पड़ता है। सिंडीकेट की वसूली अब तक सपा सरकार से जुड़े लोग कर रहे थे। सत्ता परिवर्तन के साथ उनका भी पत्ता साफ हो गया। अब मौजूदा सत्ता में रसूख रखने वाले लोग इसके लिए भागदौड़ कर रहे हैं।  
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सिंडीकेट और खर्चा दर्ज होता है रजिस्टर में

डेमो
खदानों पर बालू की बिक्री से लेकर सिंडीकेट ट्रैक्स वसूली तक की आमदनी और हर खर्च का रजिस्टरों में हिसाब दर्ज होता है। हर हफ्ते या पखवारे सिंडीकेट में शामिल पार्टनरों के बीच हिसाब होता है। मौजूदा समय में चल रही चंदौरा (एमपी घाट) में मेटेंन किए जा रहे ऐसे रजिस्टरों के कुछ पन्ने हाथ लगे हैं। रजिस्टर के एक पन्ने में एक हफ्ते का हिसाब दर्ज है। इसमें 31 ट्रक बालू की कीमत 8 लाख 51 हजार और 5000 रुपये प्रति ट्रक की दर से 30 ट्रकों का एक लाख 50 हजार रुपये सिंडीकेट वसूलना चढ़ा हुआ है। एक अन्य पेज में 9 दिनों में कुल आमदनी 18 लाख 94 हजार रुपये और सिंडीकेट एक लाख 38 हजार रुपये दर्ज है। दो लाख 55 हजार रुपये बचत लिखी है। बुंदेलखंड के पर्यावरण के पैरोकार और स्वयंसेवी आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि खदानों में पैसे के बंटवारे को लेकर अक्सर होने वाले विवादों से काली करतूतों का भंडा फूटता है। तभी यह दस्तावेज और जानकारियां हाथ लगते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार हो यह काला कारोबार रुकना मुमकिन नहीं नजर आ रहा।
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